राजनांदगांव में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए, ताकि उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
राजनांदगांव | राजनांदगांव जिले में कौशल विकास एवं रोजगार सृजन को लेकर प्रशासन ने अपनी प्राथमिकताओं को और स्पष्ट करते हुए युवाओं को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया है। इसी क्रम में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए कि जिले में संचालित सभी कौशल विकास कार्यक्रमों को स्थानीय एवं क्षेत्रीय उद्योगों की मांग से जोड़कर संचालित किया जाए।
कलेक्टर ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के पास शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ व्यवहारिक कौशल होना अत्यंत आवश्यक है। केवल डिग्री से रोजगार संभव नहीं है, बल्कि उद्योगों में उपयोगी तकनीकी दक्षता, कार्य संस्कृति और आधुनिक मशीनों के संचालन की जानकारी युवाओं को प्रशिक्षण के दौरान दी जानी चाहिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कौशल विकास केंद्र, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना तथा विभिन्न विभागों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी प्रशिक्षण संस्थान यह सुनिश्चित करें कि कोर्स डिजाइन करते समय स्थानीय उद्योगों, फैक्ट्रियों और सेवा क्षेत्र से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों को समझा जाए।
उन्होंने कहा कि जिले में निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, वेल्डिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर, डाटा एंट्री, अकाउंटिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों के अनुरूप प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार कर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए, ताकि प्रशिक्षण पूरा होते ही उन्हें रोजगार या स्वरोजगार का अवसर मिल सके।
कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि प्रशिक्षण के साथ-साथ प्लेसमेंट की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर उद्योगों और प्रशिक्षण प्रदाताओं के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित हों, जिससे प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके।
बैठक में अधिकारियों को यह भी कहा गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में केवल शहरी क्षेत्र के युवाओं तक सीमित न रहते हुए ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों के युवाओं को भी प्राथमिकता दी जाए। दूरस्थ गांवों से आने वाले युवाओं के लिए आवास, परिवहन एवं मार्गदर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई।
कलेक्टर ने कहा कि युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित करना भी समय की मांग है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान स्वरोजगार, लघु उद्योग स्थापना, बैंक ऋण प्रक्रिया, शासकीय योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी अनिवार्य रूप से दी जाए, ताकि युवा स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर सकें।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिले में उपलब्ध संसाधनों और उद्योगों के आधार पर एक स्किल गैप स्टडी तैयार की जाएगी। इस अध्ययन के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि जिले में किस प्रकार के कौशल की सबसे अधिक मांग है और किन क्षेत्रों में प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न बनकर रह जाए, बल्कि उसका वास्तविक लाभ युवाओं को मिले। प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार, अप्रेंटिसशिप और स्वरोजगार की स्थिति की भी समीक्षा की जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिले का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यदि युवा स्थानीय स्तर पर ही रोजगार पा सकें, तो पलायन की समस्या भी स्वतः कम होगी।
बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों और प्रशिक्षण संस्थानों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा जिले को कौशल आधारित रोजगार का मॉडल जिला बनाने की दिशा में ठोस पहल करने के निर्देश दिए।
