झारखंड के किसानों ने दुर्ग में छत्तीसगढ़ की उन्नत कृषि तकनीकें सीखीं, प्राकृतिक खेती, सिंचाई, फसल विविधीकरण और आधुनिक यंत्रों से खेती को लाभकारी बनाने पर जोर।
दुर्ग। झारखंड से आए किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के कृषि मॉडल, आधुनिक खेती की तकनीकों और नवाचारों को नजदीक से समझने के लिए शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान किसानों ने उन्नत बीज प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, सिंचाई के आधुनिक साधन, फसल विविधीकरण और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। यह प्रशिक्षण एवं अनुभव आदान-प्रदान कार्यक्रम दुर्ग जिले में आयोजित किया गया।
किसान प्रतिनिधिमंडल मुख्य रूप से झारखंड राज्य से आया था, जिन्हें छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक लागू की जा रही आधुनिक कृषि पद्धतियों से अवगत कराया गया।
इस अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ना है, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
🏷️ हेडिंग 1: अध्ययन भ्रमण से किसानों को मिला व्यावहारिक अनुभव
कार्यक्रम के तहत झारखंड के किसानों को खेतों में प्रत्यक्ष रूप से आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन कराया गया। किसानों ने बीज उपचार, उन्नत किस्मों की पहचान, कतारबद्ध बुवाई, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली सहित कई तकनीकों को मौके पर देखा और समझा।
किसानों ने बताया कि पुस्तकों या प्रशिक्षण सत्रों से मिली जानकारी की तुलना में प्रत्यक्ष खेतों में तकनीकों को देखकर सीखना अधिक उपयोगी साबित हुआ।
🏷️ हेडिंग 2: प्राकृतिक खेती और जैविक तरीकों पर विशेष जोर
कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, जीवामृत, घन जीवामृत और कीट नियंत्रण के घरेलू उपायों की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर किस प्रकार मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखा जा सकता है।
किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती से न केवल लागत घटती है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य भी बेहतर मिलता है।
🏷️ हेडिंग 3: उन्नत सिंचाई तकनीक बनी आकर्षण का केंद्र
झारखंड के किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित सिंचाई प्रणाली रही। उन्हें बताया गया कि सीमित जल संसाधनों में भी किस प्रकार सटीक मात्रा में पानी देकर फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि माइक्रो इरिगेशन तकनीक से जल की 40 से 50 प्रतिशत तक बचत संभव है, जिससे खेती अधिक टिकाऊ बनती है।
🏷️ हेडिंग 4: फसल विविधीकरण से बढ़ रही किसानों की आय
कार्यक्रम में किसानों को परंपरागत फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन, दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों को अपनाने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय फसल चक्र अपनाने से जोखिम कम होता है और सालभर आय के स्रोत बने रहते हैं।
किसानों को पॉलीहाउस, शेडनेट और नर्सरी प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई।
🏷️ हेडिंग 5: आधुनिक मशीनों से खेती हुई आसान
झारखंड से आए किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे सीड ड्रिल, पावर वीडर, मल्चर और स्प्रे मशीनों का प्रदर्शन कराया गया। किसानों ने बताया कि इन मशीनों से श्रम लागत घटती है और समय की भी बचत होती है।
किसानों को यह भी बताया गया कि समूह बनाकर या कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से महंगे यंत्रों का उपयोग आसानी से किया जा सकता है।
🏷️ हेडिंग 6: बाजार से जुड़ाव और मूल्य संवर्धन पर चर्चा
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही बाजार तक पहुंच बनाना भी जरूरी है। किसानों को फसल ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण और मूल्य संवर्धन की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ई-मार्केटिंग और किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से बिक्री के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
🏷️ हेडिंग 7: झारखंड में लागू होंगी सीखी गई तकनीकें
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि दुर्ग में देखी गई कई तकनीकों को वे अपने-अपने गांवों में लागू करेंगे। उन्होंने विशेष रूप से प्राकृतिक खेती, सब्जी उत्पादन और ड्रिप सिंचाई प्रणाली को प्राथमिकता देने की बात कही।
किसानों ने यह भी कहा कि वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इन तकनीकों के बारे में जागरूक करेंगे, ताकि सामूहिक रूप से खेती को लाभकारी बनाया जा सके।
🏷️ हेडिंग 8: अंतरराज्यीय सहयोग से मजबूत होगी कृषि व्यवस्था
कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के अंतरराज्यीय प्रशिक्षण और अनुभव साझा करने से किसानों को नई सोच, नई तकनीक और बेहतर बाजार समझ मिलती है। इससे दोनों राज्यों के किसानों के बीच सहयोग और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि झारखंड के किसान छत्तीसगढ़ में सीखी गई तकनीकों से अपनी कृषि व्यवस्था को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बना सकेंगे।
