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बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ से 40 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 13 लोगों की मौत

अंतराष्ट्रीय ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 23 August 2024

ढाका
बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ से 13 लोगों की मौत हो गई। बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवार विस्थापित हो गए हैं। खबर के अनुसार, आपदा प्रबंधन एवं राहत मंत्रालय के तहत देश के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया समन्वय केंद्र ने लेटेस्ट दैनिक आपदा स्थिति रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 64 जिलों में से 11 में बाढ़ के कारण लगभग 44 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशियाई देश में बाढ़ के कारण 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। भारी मौसमी वर्षा तथा भारतीय सीमा पार पहाड़ियों से पानी के प्रवाह के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से देश के बड़े हिस्से में मकानों, फसलों, सड़कों और राजमार्गों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। राहत और बचाव के लिए कई केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर करीब 200,000 लोगों ने शरण ली है। अधिकारियों ने बचाव अभियान चलाने और राहत सामग्री वितरित करने के लिए आपदा प्रतिक्रिया बलों की टीमों को इन केंद्रों पर भेजा है।

बांग्लादेश के कई हिस्सों में शुक्रवार को बारिश रुक गई और ढाका में मौसम अधिकारियों ने कहा कि कुछ इलाकों में पानी घटने लगा है लेकिन बाढ़ कई दिनों तक खत्म नहीं होगी। ढाका स्थित एकोन टीवी ने शुक्रवार को बताया कि बांग्लादेश में पिछले 24 घंटों में सात और लोगों की मौत हो गई। इससे पहले, भारत से नीचे की ओर बाढ़ के पानी में चार लोगों की मौत की खबर आई थी, और देश के पूर्वी क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी।

बांग्लादेशी गैर-सरकारी संगठन बीआरएसी ने एक बयान में कहा कि तेज़ी से बढ़ते पानी ने कृषि भूमि के विशाल क्षेत्रों को जलमग्न कर दिया है। क्षेत्रों के जलमग्न होने से आजीविका, घर और फसलें नष्ट हो गई हैं। इससे लगभग 30 लाख लोगों का जीवन अस्त वयस्त हो गया है। बीआरएसी ने कहा कि कई लोग बिजली, भोजन या पानी के बिना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अन्य मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 170 मिलियन की आबादी वाले डेल्टा राष्ट्र में 4.5 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं।

कई चैरिटी समूहों की मदद से एक छात्र समूह देश की राजधानी में ढाका विश्वविद्यालय में सूखा भोजन, नकदी, पानी और दवाइयां एकत्र कर रहा है। बीआरएसी के जलवायु परिवर्तन, शहरी विकास और आपदा जोखिम प्रबंधन के निदेशक लियाकत अली ने कहा कि यह बांग्लादेश में तीन दशकों में आई सबसे भीषण बाढ़ थी। उन्होंने कहा, "पूरे गांव, उनमें रहने वाले सभी परिवार और उनका सब कुछ – घर, मवेशी, खेत, मछली पालन बह गए हैं। लोगों के पास कुछ भी बचाने का समय नहीं था। देश भर में लोग फंसे हुए हैं और हमें उम्मीद है कि बारिश जारी रहने के कारण कई जगहों पर स्थिति और खराब हो जाएगी।" ढाका स्थित द बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार ने शुक्रवार को बताया कि पूर्वी जिले कमिला में गोमती नदी में बाढ़ सुरक्षा तटबंध पर नई दरारें आने से गुरुवार आधी रात से करीब 100 निचले गांवों में पानी भर गया। नोआखली, फेनी और चटगांव सहित अन्य जिले भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

क्यूमिला में घटनास्थल पर स्वयंसेवकों ने गुरुवार मध्य रात्रि को हुई चोरी के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सचेत करने का प्रयास किया, जबकि निवासियों ने चेतावनी देने के लिए पड़ोस की मस्जिदों पर लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल किया। क्षेत्र के कुछ पीड़ितों ने टेलीविजन स्टेशनों को बताया कि वे अपना सामान वहीं छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं। सेना ने शुक्रवार को प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और सूखा भोजन पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया। बता दें कि बांग्लादेश में सोशल मीडिया पर अफवाहें फैली हुई हैं कि बाढ़ का कारण भारत द्वारा त्रिपुरा में डंबूर बांध खोलना है। इस अफवाह को लेकर बांग्लादेश में कई भारत विरोधी प्रदर्शन हुए। भारत के विदेश मंत्रालय ने इससे इनकार करते हुए कहा कि बांध सीमा से बहुत दूर है और भारी बारिश के कारण दोनों देशों के बड़े क्षेत्र में बाढ़ आ गई है।

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