रायगढ़ में झोला छाप डॉक्टर की लापरवाही से युवक की मौत, आदिवासी समाज आक्रोशित, 50 लाख मुआवजे और जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की मांग उठी।
रायगढ़। झोला छाप डॉक्टरों की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है, जहां गलत इलाज के कारण एक युवक की मौत हो गई। यह घटना आदिवासी बहुल इलाके में हुई, जिसके बाद पूरे समाज में भारी आक्रोश फैल गया। परिजनों और ग्रामीणों ने जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, साथ ही मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग भी रखी है।
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घटना की पूरी जानकारी
मिली जानकारी के अनुसार, युवक की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे गांव के पास मौजूद झोला छाप डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर ने बिना उचित जांच और दवा का प्रयोग किए गलत इंजेक्शन दे दिया, जिससे युवक की हालत गंभीर हो गई। उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
आदिवासी समाज का गुस्सा फूटा
युवक की मौत के बाद आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में इकठ्ठा हो गए। उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि गांव-गांव में झोला छाप डॉक्टर खुलेआम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
मुआवजे और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की है। साथ ही झोला छाप डॉक्टरों पर कठोर कार्रवाई करने और उनके खिलाफ स्थायी समाधान निकालने की भी मांग की है।
प्रशासनिक रुख
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने लोगों को शांत करने का प्रयास किया और पूरे मामले की जांच का भरोसा दिलाया। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े करती है। जहां सरकारी अस्पताल और डॉक्टरों की कमी के चलते लोग मजबूरी में झोला छाप डॉक्टरों पर निर्भर हो जाते हैं।
