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426 बच्चों के भोजन में शिक्षक ने मिलाई फिनाइल

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 26 August 2025

426 बच्चे भोजन, शिक्षक की लापरवाही, फिनाइल गोली स्कूल, मिड-डे मील हादसा, बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा विभाग जांच, स्कूल भोजन विषाक्त, शिक्षक गिरफ्तार, अभिभावकों का गुस्सा, प्रशासनिक कार्रवाई

सुकमा. छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक ने स्कूल के 426 बच्चों के भोजन में फिनाइल की गोली मिलाने का प्रयास किया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। समय रहते घटना का पता चलने से बड़ा हादसा टल गया।

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घटना का विवरण

जानकारी के अनुसार, स्कूल में बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार किया जा रहा था। उसी दौरान एक शिक्षक ने चुपके से भोजन में फिनाइल की गोली डाल दी। बच्चों और रसोइयों ने जैसे ही खाना परोसा जाना शुरू हुआ, अचानक अजीब गंध महसूस की और शक होने पर खाना रोक दिया गया।

जांच में सामने आया कि खाने में फिनाइल का अंश मौजूद था। तुरंत ही प्रशासन को सूचना दी गई और पुलिस मौके पर पहुंची।


बच्चों और अभिभावकों में दहशत

इस घटना की खबर फैलते ही स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सैकड़ों बच्चों के अभिभावक स्कूल पहुंच गए। परिजनों में गुस्सा और डर दोनों देखने को मिला। लोग शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग करने लगे।


प्रशासन की कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आ गया। आरोपी शिक्षक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। खाद्य पदार्थ की जांच के लिए सैंपल लैब भेजे गए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराई जाएगी। यदि शिक्षक की संलिप्तता साबित होती है तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।


बड़ा हादसा टला

स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और बच्चों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। सौभाग्य से किसी बच्चे ने वह भोजन नहीं खाया था, वरना परिणाम बहुत भयावह हो सकते थे।


ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा

ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से कड़ी सजा की मांग की है।


सवालों के घेरे में मिड-डे मील की सुरक्षा

यह घटना एक बार फिर मिड-डे मील की सुरक्षा और मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े करती है। बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस कार्यक्रम की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।


निष्कर्ष

426 बच्चों की जान पर भारी पड़ने वाली यह घटना गंभीर लापरवाही और अपराध का उदाहरण है। समय रहते चौकसी से हादसा टल गया, लेकिन इसने प्रशासन और समाज दोनों को सतर्क कर दिया है।


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