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आज अनंत चतुर्दशी: गणेश और विष्णु पूजा पर्व

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 6 September 2025

आज अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु और गणेश की पूजा, अनंत धागा बांधने की परंपरा, भक्ति, सुख, समृद्धि और शांति के लिए विशेष महत्व।


आज पूरे भारत में अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान गणेश के विसर्जन के साथ-साथ भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ मंदिरों में पहुँचकर भगवान की आराधना कर रहे हैं।

अनंत चतुर्दशी पर सबसे प्रमुख परंपरा अनंत धागा बांधने की होती है। यह लाल और पीले रंग का धागा होता है, जिसे भक्त अपनी कलाई या अंगूठे पर बांधते हैं। इस अनंत धागे को बांधने का मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करना और जीवन में सुख, समृद्धि, शांति व दीर्घायु सुनिश्चित करना माना जाता है।

गणेश विसर्जन के साथ इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। भक्त अपने घरों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर गणेश जी की प्रतिमाओं का विधिपूर्वक विसर्जन करते हैं। विसर्जन के दौरान कई जगहों पर भव्य शोभायात्राओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

अनंत चतुर्दशी का पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस दिन लोग अपने परिवार और समुदाय के लोगों के साथ मिलकर पूजा-अर्चना करते हैं, भजन और कीर्तन का आयोजन करते हैं और समाज में भाईचारा और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर बांधा गया अनंत धागा एक वर्ष तक कलाई पर रखना चाहिए और अगले वर्ष उसी अवसर पर नया धागा बांधा जाता है। यह धागा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

आज के दिन भगवान विष्णु की अनंत रूप की कथा भी सुनाई जाती है, जिसमें उनकी व्यापक, अनंत शक्ति और सृष्टि के संचालन की महिमा का वर्णन होता है। यह कथा बच्चों और युवाओं के लिए भी शिक्षा और प्रेरणा का स्रोत है।

अनंत चतुर्दशी का यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात और कर्नाटक में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा और हवन के आयोजन किए जाते हैं। भक्तजन रातभर जागरण करते हैं और भगवान की स्तुति में ध्यान लगाते हैं।

इस दिन का संदेश सभी के लिए यही है कि भक्ति, समर्पण और धार्मिक आस्था के माध्यम से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

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