छत्तीसगढ़ में भारी बारिश के कारण पुराना कुआं धंस गया, मलबे में दबकर एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
रायगढ़। राज्य में जारी भारी बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला रायगढ़ जिले से सामने आया है, जहां एक पुराना कुआं अचानक धंस गया और उसकी चपेट में आकर एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब परिवार के सदस्य कुएं के पास काम कर रहे थे।
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घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है, जबकि प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है और घटना की जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
📍 कैसे हुआ हादसा
घटना रायगढ़ जिले के एक गांव की है, जहां बीती रात से लगातार बारिश हो रही थी। बताया जा रहा है कि गांव के बाहर स्थित एक पुराना कुआं, जिसकी दीवारें वर्षों से जर्जर थीं, पानी के दबाव और मिट्टी की ढलान के चलते अचानक धंस गया।
कुएं के पास उस समय एक ही परिवार के तीन सदस्य — पिता, मां और उनका 14 वर्षीय बेटा — कुछ सामान निकालने और पानी भरने का काम कर रहे थे। अचानक जमीन धंस गई और तीनों लोग मलबे में दब गए।
🚨 स्थानीय लोगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और खुदाई शुरू कर दी। साथ ही पुलिस और आपदा राहत दल को सूचना दी गई। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद मलबे से तीनों शव निकाले गए।
गांव के सरपंच ने बताया कि “यह हादसा प्रशासन की लापरवाही और समय रहते मरम्मत न कराने के कारण हुआ। कई बार शिकायत देने के बावजूद कुएं की मरम्मत नहीं हुई थी।”
🧑🤝🧑 परिवार में मातम:
मृतक परिवार गांव में सामान्य किसान था। पिता खेती करता था और मां घर संभालती थी। बेटा अभी आठवीं कक्षा में पढ़ता था। पूरा गांव इस दर्दनाक हादसे के बाद गमगीन है और हर आंख नम।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि यह कुआं करीब 40 साल पुराना था और इसे पिछले 10 वर्षों से बिना किसी मरम्मत के इस्तेमाल किया जा रहा था।
📣 प्रशासन का जवाब:
जिला कलेक्टर ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “भारी बारिश के चलते पुराने निर्माण कमजोर हो जाते हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुएं की दीवारें पहले से ही कमजोर थीं। पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।”
राजस्व विभाग की टीम ने भी मौके का निरीक्षण किया और मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख प्रति व्यक्ति मुआवजे की घोषणा की गई है।
⚠️ क्या कहता है मौसम विभाग?
मौसम विभाग पहले ही छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी कर चुका था। पिछले 48 घंटों में रायगढ़ सहित कई क्षेत्रों में 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बारिश से जमीन की ऊपरी सतह नरम हो जाती है, जिससे पुराने निर्माण जैसे कुएं, बाउंड्री वॉल आदि ढह सकते हैं।
🧱 गांव में और भी खतरे:
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ऐसे कई और पुराने कुएं हैं, जिनकी दीवारें क्षतिग्रस्त हैं और वे भी गिरने की कगार पर हैं। लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि सभी पुराने सार्वजनिक संरचनाओं की तत्काल जांच और मरम्मत कराई जाए।
📌 जन सुरक्षा की ज़रूरत:
इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते चेतावनी, निरीक्षण और मैनटेनेंस के जरिए ऐसे हादसों को टाला जरूर जा सकता है।
🛑 सोचने वाली बात:
क्या ऐसे हादसे हमारी लापरवाही का नतीजा हैं? क्या प्रशासन को पहले से सतर्क नहीं होना चाहिए था? और क्या पुराने निर्माण की समय-समय पर जांच हमारी प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?
जब तक हम इन सवालों पर गंभीरता से विचार नहीं करेंगे, तब तक इस तरह की त्रासदियां होती रहेंगी और मासूम जानें जाती रहेंगी।
