छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में फंसे अनवर ढेबर को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने ACB द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।
रायपुर। बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को एक और बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार को उसकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।
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अनवर ढेबर, जो रायपुर नगर निगम का पूर्व नेता प्रतिपक्ष और एक प्रभावशाली व्यापारी है, शराब घोटाले में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का मुख्य आरोपी है। गिरफ्तारी के बाद से ही उसने इसे राजनीतिक साजिश बताया था और कोर्ट में इसे चुनौती दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट ने उसकी दलीलों को खारिज कर दिया है।
📍 क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ में 2023 में उजागर हुआ शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जा रहा है। आरोप है कि आबकारी विभाग, सप्लाई चेन और अधिकारियों की मिलीभगत से राज्य में नकली और अवैध शराब की बिक्री कर सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया।
इस घोटाले में अनवर ढेबर का नाम सामने आया, जिसे ACB ने मई 2023 में गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि वह इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड था और बड़े पैमाने पर घोटाले की योजना बनाकर उसे अंजाम तक पहुंचाया।
⚖️ हाईकोर्ट में क्या हुआ?
अनवर ढेबर ने ACB की कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताते हुए इसे चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उसकी गिरफ्तारी में कानून का पालन नहीं किया गया और उसे बिना पर्याप्त साक्ष्य के फंसाया गया है।
लेकिन न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ACB द्वारा की गई कार्रवाई प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होती है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
🗣️ सरकारी पक्ष की दलील:
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अनवर ढेबर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं और गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अनवर का प्रभाव इतना अधिक है कि अगर वह बाहर रहता तो जांच को प्रभावित कर सकता था।
📉 अनवर ढेबर को झटका क्यों?
यह फैसला अनवर ढेबर के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब उसके पास अग्रिम जमानत या गिरफ्तारी को चुनौती देने का कोई विकल्प नहीं बचा है। इसके अलावा, यह फैसला ACB और ईडी जैसी जांच एजेंसियों को भी जांच आगे बढ़ाने के लिए कानूनी बल प्रदान करता है।
🔎 ईडी और ACB की संयुक्त जांच:
शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ACB द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। ED पहले ही इस मामले में कई चार्जशीट दाखिल कर चुका है, जिनमें अनवर ढेबर का नाम प्रमुख आरोपियों में है।
अब ACB के पास उच्च न्यायालय की स्वीकृति होने के बाद वह जांच को और गहराई से आगे बढ़ा सकेगा। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और कई नाम सामने आ सकते हैं।
👥 राजनीतिक प्रतिक्रिया:
इस मामले में विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर सवाल उठाता रहा है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “अनवर ढेबर कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, इसलिए घोटाले की गहराई तक जांच होनी चाहिए।”
वहीं कांग्रेस नेताओं ने यह कहते हुए बचाव किया कि “कानून अपना काम कर रहा है, दोषी चाहे कोई भी हो, उसे सजा मिलेगी।”
📣 जनता में संदेश:
यह फैसला उन लोगों के लिए एक संदेश है जो मानते हैं कि राजनीतिक रसूख के बल पर वे कानून से ऊपर हैं। हाईकोर्ट का रुख यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब कोर्ट भी सख्त रुख अपना रही है।
📌 सोचने योग्य बात
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केवल एक व्यक्ति या विभाग की लापरवाही नहीं है, यह उस पूरी व्यवस्था की कमजोरी का प्रतीक है जो सत्ता, पैसा और प्रभाव के बीच कहीं न कहीं न्याय से समझौता करती है।
अब जब कोर्ट ने स्पष्ट रूप से गिरफ्तारी को वैध ठहराया है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे की जांच में और कितनी बड़ी मछलियां जाल में आती हैं।
