बलौदाबाजार में ट्रक की टक्कर से बाइक सवार घायल हुआ, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिला। परिजनों ने अस्पतालों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की लचर हालत उजागर करने वाली दुखद घटना सामने आई है। एक सड़क दुर्घटना में घायल युवक की मौत इसलिए हो गई क्योंकि उसे समय पर इलाज नहीं मिल पाया। परिजनों का आरोप है कि युवक को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करते रहे, लेकिन कहीं भी इलाज शुरू नहीं किया गया। अंत में युवक ने दम तोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह हादसा बलौदाबाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र का है। रविवार को एक युवक अपनी बाइक से जा रहा था, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी। हादसे में युवक के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया और वह वहीं सड़क पर गिर गया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को बुलाया और युवक को जिला अस्पताल बलौदाबाजार ले जाया गया। लेकिन वहां से उसे रायपुर रेफर कर दिया गया, क्योंकि वहां अस्थि विशेषज्ञ मौजूद नहीं था।
रेफर सिस्टम बना मौत की वजह
परिजन युवक को लेकर रायपुर के अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर्स ने हालत गंभीर बताते हुए एम्स या दूसरे बड़े ट्रॉमा सेंटर ले जाने की सलाह दी। बार-बार रेफर किए जाने और घंटों तक इधर-उधर भटकने के कारण युवक का समय पर इलाज नहीं हो पाया और उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों का दर्द: इलाज मिलता तो बच जाती जान
मृतक के भाई ने बताया:
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही और जवाबदेही से बचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि:
- बलौदाबाजार जिला अस्पताल में आपातकालीन ऑर्थोपेडिक सुविधा क्यों नहीं है?
- गंभीर रूप से घायल मरीज को ट्रॉमा केयर क्यों नहीं मिला?
- रेफर-रेफर के चक्कर में कितनी और जानें जाएंगी?
स्वास्थ्य अधिकारियों का जवाब
जब मीडिया ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात की, तो उनका कहना था:
नियमित समस्या बन चुकी है रेफर पॉलिसी
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और जिला अस्पतालों में रेफर की समस्या अब एक आम बात हो गई है। डॉक्टरों के पास सुविधाएं नहीं होने का बहाना बनाकर वे सीधे मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में भेज देते हैं। लेकिन कई बार यह देरी मरीज की जान पर भारी पड़ती है।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
घटना के बाद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई। एक स्थानीय पार्षद ने कहा:
अंतिम संस्कार और मातम का माहौल
युवक का अंतिम संस्कार सोमवार को गांव में किया गया। पूरे गांव में शोक और गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई हो।
- जिला अस्पताल में 24×7 ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की तैनाती हो।
- गंभीर रोगियों के लिए प्राथमिक इलाज की व्यवस्था हर अस्पताल में हो।
निष्कर्ष
बलौदाबाजार की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की असल तस्वीर है। रेफर सिस्टम, संसाधनों की कमी और जवाबदेही से बचते अधिकारी जब तक सुधार नहीं लाएंगे, तब तक ऐसी मौतें होती रहेंगी।
समय आ गया है कि शासन, प्रशासन और समाज सभी मिलकर इस सिस्टम में बदलाव लाएं—वरना अगला नंबर किसी और के अपने का हो सकता है।
