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किसान ने वनभूमि छोड़ी, समाज के लिए बनी मिसाल

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 23 August 2025

बस्तर में किसान सोन सिंह ने वनमंत्री के आग्रह पर स्वेच्छा से वनभूमि कब्जा छोड़ा। यह कदम समाज के लिए प्रेरणा और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल बना।

जगदलपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से एक प्रेरणादायी घटना सामने आई है। वनमंत्री श्री केदार कश्यप के बस्तर प्रवास के दौरान बेसोली में आयोजित वन महोत्सव के मंच से एक अनूठी पहल शुरू हुई, जब पीपलवांड ग्राम पंचायत के निवासी किसान सोन सिंह पिता पदम ने अपनी कब्जाई हुई वनभूमि को ग्रामवासियों के समक्ष लिखित में स्वेच्छा से वापस कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने यह भी प्रतिज्ञा ली कि भविष्य में वह कभी भी इस प्रकार की गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।

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वनमंत्री की अपील पर लिया बड़ा निर्णय

वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने वन महोत्सव के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए पीपलवांड के किसान सोन सिंह से आग्रह किया कि वे वनभूमि पर किए गए कब्जे को छोड़कर समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें। मंत्री की अपील और ग्राम पंचायत, ग्रामीणों की उपस्थिति में सोन सिंह ने तुरंत निर्णय लेते हुए अपनी कब्जाई भूमि को वापस करने का ऐतिहासिक कदम उठाया।

वनमंत्री ने इस साहसिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा –
“सोन सिंह का यह कदम समाज के लिए अनुकरणीय है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि अन्य लोग भी प्रेरित होकर वनभूमि से कब्जा छोड़ने के लिए आगे आएंगे।”


ग्रामवासियों ने किया स्वागत

पीपलवांड के सरपंच श्री केशव ने पूरे ग्राम पंचायत की ओर से किसान के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के त्याग से न केवल ग्राम का मान बढ़ा है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत संदेश गया है।

गांव के अन्य लोगों ने भी इस निर्णय की प्रशंसा की और सोन सिंह को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह कदम निश्चित रूप से औरों को भी प्रेरित करेगा।


वन विभाग की पहल सफल

वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को बेहद सकारात्मक बताते हुए कहा कि लगातार जनजागरूकता और संवाद से ही इस तरह के परिणाम सामने आ रहे हैं।
मुख्य वन संरक्षक श्री आर. सी. दुग्गा और वनमंडलाधिकारी श्री उत्तम गुप्ता के नेतृत्व में चल रही इस पहल का प्रभाव यह है कि अब लोग स्वयं ही आगे आकर अपनी कब्जाई वनभूमि वापस करने लगे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में वनभूमि पर अवैध कब्जा एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया था। लेकिन अब धीरे-धीरे लोग समझ रहे हैं कि वन और पर्यावरण की रक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है।


किसान सोन सिंह की मिसाल

किसान सोन सिंह ने ग्रामवासियों के बीच स्पष्ट कहा कि उन्होंने यह कदम पूरी तरह से अपनी मर्जी से उठाया है। उन्होंने कहा –
“जंगल हमारा जीवन है। यदि हम ही इसे नुकसान पहुंचाएंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां कैसे जिएंगी? मुझे खुशी है कि मैंने यह भूमि वापसी कर सही निर्णय लिया।”

उनकी इस बात ने पूरे गांव में सकारात्मक माहौल बना दिया।


अतिक्रमण छोड़ने का आग्रह

वनमंत्री श्री कश्यप ने इस अवसर पर अन्य अतिक्रमणकारियों से भी अपील की कि वे स्वयं से आगे आकर अपनी कब्जाई भूमि को वन विभाग को सौंप दें। उन्होंने कहा कि यदि लोग स्वयं ही इस दिशा में आगे आते हैं तो प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और समाज में सहयोग की भावना मजबूत होगी।

वनमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि जो भी लोग इस तरह का कदम उठाते हैं, उन्हें सरकार की योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि उनके जीवनयापन पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।


वन महोत्सव का महत्व

बेसोली में आयोजित वन महोत्सव केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीणों और सरकार के बीच एक मजबूत संवाद का मंच भी साबित हुआ। यहां ग्रामीणों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि वनभूमि की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण कैसे सबके जीवन को प्रभावित करते हैं।

इस महोत्सव में बड़ी संख्या में ग्रामीण, वन विभाग के कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और विद्यार्थी शामिल हुए।


संदेश पूरे प्रदेश के लिए

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक संदेश है। अक्सर वनभूमि कब्जे को लेकर विवाद बढ़ते हैं और प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ती है। लेकिन यदि लोग स्वयं आगे आएं, तो न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि समाज में आपसी सहयोग की मिसाल भी कायम होगी।


निष्कर्ष

किसान सोन सिंह का यह निर्णय छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक उदाहरण है। वनभूमि छोड़कर उन्होंने यह साबित किया कि जिम्मेदारी और त्याग व्यक्तिगत हित से कहीं बड़ा होता है। वनमंत्री श्री केदार कश्यप के प्रयास और वन विभाग की सक्रियता से अब यह उम्मीद की जा रही है कि और भी लोग इस दिशा में आगे बढ़ेंगे और वनभूमि को वापस करेंगे।

यह कदम केवल भूमि की वापसी नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के बीच संतुलन का प्रतीक बन गया है।


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