सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल और उनके बेटे की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, हाईकोर्ट में अपील करने की दी सलाह।
रायपुर।छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। याचिका उस मामले से जुड़ी थी, जिसमें दोनों को कथित रूप से एक भूमि विवाद और उसके संबंध में दर्ज आपराधिक मामले में राहत की उम्मीद थी।
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क्या है मामला?
यह मामला रायपुर के पास स्थित एक भूमि सौदे और मुआवज़े से जुड़ा हुआ है, जिसमें भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल का नाम एक एफआईआर में दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने एक प्रॉपर्टी को लेकर कुछ अनियमितताएं कीं और दूसरे पक्ष को धोखा दिया।
हालांकि, दोनों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन अदालत ने साफ किया कि इस स्तर पर वह हस्तक्षेप नहीं करेगी और संबंधित पक्ष को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिंहा की पीठ ने कहा कि यह मामला तथ्यों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया से गुजरना चाहिए, जिसके लिए उचित मंच हाईकोर्ट है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट प्रथम दृष्टया इस मामले में कोई तत्काल राहत देने की स्थिति में नहीं है।
भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यह एक राजनीतिक साजिश है, जिसके तहत उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और जल्द ही हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। भाजपा नेताओं ने जहां इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया, वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भूपेश बघेल को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भूपेश बघेल के समर्थन में बयान जारी किया।
जानिए क्या कहता है कानून
एफआईआर रद्द कराने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर तभी सुनवाई करता है जब याचिकाकर्ता यह साबित कर सके कि मामला पूरी तरह से झूठा है और प्रथम दृष्टया किसी अपराध का कोई आधार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की यह परंपरा रही है कि पहले हाईकोर्ट से राहत की कोशिश की जाए।
अब आगे क्या?
भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। यदि हाईकोर्ट भी एफआईआर को रद्द करने से इनकार करता है, तो फिर मामला ट्रायल कोर्ट की ओर बढ़ेगा।


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