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कच्चे मकान की दीवार ढही, मासूम मृत, दादी घायल

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 5 September 2025


कच्चे मकान की दीवार गिरने से मासूम की मौत, दादी गंभीर घायल। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया, परिवार को आर्थिक सहायता देने की घोषणा।

जगदलपुर.छत्तीसगढ़ के एक ग्रामीण क्षेत्र से दुखद घटना सामने आई है। सोमवार की सुबह अचानक कच्चे मकान की दीवार ढह जाने से मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि उसकी दादी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

हादसा कैसे हुआ

स्थानीय लोगों के अनुसार परिवार एक कच्चे मकान में रह रहा था। भारी बारिश के कारण मकान की दीवार कमजोर हो गई थी। सुबह के समय दीवार अचानक भरभराकर गिरी, जिससे मासूम मलबे के नीचे दब गया। घर में मौजूद दादी भी दीवार की चपेट में आ गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं।

बचाव कार्य और अस्पताल ले जाया गया

घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने की कोशिश की। बच्चे को बाहर निकाला गया लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। दादी को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

प्रशासन की भूमिका

हादसे की जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे। राजस्व विभाग की टीम ने मुआयना किया और परिवार को तात्कालिक सहायता राशि देने की घोषणा की। साथ ही मकान को जर्जर और असुरक्षित घोषित कर अन्य ग्रामीणों को सावधानी बरतने की अपील की गई।

ग्रामीणों की नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में कई कच्चे मकान जर्जर हालत में हैं। कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका मानना है कि यदि समय रहते इन मकानों का सर्वे और मरम्मत कार्य कराया जाता, तो ऐसी घटना टल सकती थी।

सामाजिक संगठनों की मदद

घटना के बाद कई सामाजिक संगठनों ने परिवार को मदद का आश्वासन दिया है। बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी निभाने की बात भी कही गई।

विशेषज्ञों की राय

स्थानीय इंजीनियरों का मानना है कि लगातार बारिश और लापरवाही की वजह से ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकान हादसों का कारण बन रहे हैं। समय-समय पर मकानों की मरम्मत और पक्के घरों की ओर रुझान आवश्यक है।

निष्कर्ष

यह घटना ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों की असुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही दोनों की ओर इशारा करती है। अब जरूरत है कि सरकार और स्थानीय निकाय इस मुद्दे को गंभीरता से लें और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करें।


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