मंत्री रामविचार नेताम ने दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में शिक्षा सुधार, नई शिक्षा नीति और विकास योजनाओं पर चर्चा की।
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता और मंत्री श्री रामविचार नेताम ने राजधानी दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से सौजन्य मुलाकात की। यह बैठक शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और संभावनाओं पर केंद्रित रही। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात न केवल शिष्टाचार के रूप में हुई, बल्कि इसमें प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा भी की गई।
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बैठक का उद्देश्य
मुलाकात के दौरान मंत्री रामविचार नेताम ने छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक ढांचे, उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास और नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने प्रदेश में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र से सहयोग की अपेक्षा जताई।
छत्तीसगढ़ में शिक्षा की संभावनाएं
रामविचार नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन्हें साकार करने के लिए आधुनिक संसाधनों, प्रशिक्षित शिक्षकों और डिजिटल शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने इस दिशा में केंद्रीय स्तर पर विशेष योजनाओं की मांग की।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए सभी संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के तहत राज्यों के साथ मिलकर शिक्षा को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
नई शिक्षा नीति पर जोर
दोनों नेताओं ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत पाठ्यक्रम में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा और डिजिटल माध्यम से सीखने को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाने पर सहमति जताई।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
बैठक में विशेष रूप से चर्चा हुई कि कैसे आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है। मंत्री नेताम ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता
दोनों नेताओं ने माना कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, निजी क्षेत्र और स्थानीय संस्थाओं का भी सहयोग जरूरी है।
भविष्य की दिशा
बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि केंद्र और राज्य के बीच संवाद और सहयोग की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।
