नेशनल स्पेस डे पर पीएम मोदी ने भारत के एस्ट्रोनॉट पूल बनाने की घोषणा की। उन्होंने युवाओं को अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया और 350+ स्पेस स्टार्टअप्स पर प्रकाश डाला।
नई दिल्ली।नेशनल स्पेस डे के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ रॉकेट और उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष अनुसंधान, स्पेस स्टार्टअप्स और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
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प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सबसे अहम घोषणा करते हुए कहा कि भारत अब अपना ‘एस्ट्रोनॉट पूल’ (Astronaut Pool) तैयार कर रहा है। इस पहल से देश के वैज्ञानिकों और युवाओं को अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। पीएम मोदी ने कहा – “आज का भारत हर उस लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम है, जिसे कभी नामुमकिन समझा जाता था। हमें आने वाले समय में न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान बल्कि मानव अंतरिक्ष मिशनों में भी आत्मनिर्भर बनना है। इसके लिए एस्ट्रोनॉट पूल तैयार किया जा रहा है, जिससे देश के अंतरिक्ष अभियानों को स्थायी और सशक्त समर्थन मिलेगा।”
युवाओं को जोड़ा जाएगा अंतरिक्ष अभियान से
पीएम मोदी ने युवाओं को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य विज्ञान और तकनीक की प्रगति पर आधारित है। उन्होंने देशभर के छात्रों और युवा वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अंतरिक्ष अनुसंधान और स्टार्टअप्स में आगे आएं। उन्होंने कहा – “आज के युवा अगर देश की तकनीकी शक्ति को और मजबूत करेंगे, तो भारत 2047 तक विश्व की प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनकर उभरेगा।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की नई शिक्षा नीति ने विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया है। स्पेस साइंस में करियर बनाने के लिए छात्रों को अब पहले से अधिक अवसर उपलब्ध हैं।
350 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स देश में सक्रिय
प्रधानमंत्री मोदी ने गर्व से बताया कि आज भारत में 350 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। ये स्टार्टअप्स न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान को गति दे रहे हैं बल्कि उपग्रह प्रक्षेपण, डेटा एनालिटिक्स, संचार तकनीक और स्पेस रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकों में भी योगदान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र और सरकार की भागीदारी से भारत का स्पेस सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है। इससे देश को आर्थिक लाभ के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
आत्मनिर्भर भारत और अंतरिक्ष शक्ति
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र में भी ‘मेड इन इंडिया’ तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब उपग्रह, लॉन्च व्हीकल और अन्य उपकरणों का निर्माण देश में ही किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार केवल विज्ञान और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा, कृषि, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और संचार प्रणाली को भी सशक्त बनाता है।
वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में भारत की स्थिति
पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया की उन गिनी-चुनी ताकतों में शामिल है जो चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर मिशन भेजने में सफल हुए हैं। चंद्रयान और मंगलयान की सफलता ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को साबित किया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत स्पेस एक्सप्लोरेशन (Space Exploration) के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करेगा। इसके साथ ही, अंतरिक्ष पर्यटन और वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण में भी भारत बड़ी भूमिका निभाएगा।
वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई
प्रधानमंत्री ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ने भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे आने वाले अभियानों में और अधिक नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास पर जोर दें।
अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े प्रमुख बिंदु
- भारत अब अपना पहला एस्ट्रोनॉट पूल तैयार कर रहा है।
- युवाओं को अंतरिक्ष अभियानों से जोड़ा जाएगा।
- देश में 350 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अंतरिक्ष तकनीक का निर्माण देश में ही होगा।
- अंतरिक्ष अनुसंधान अब केवल वैज्ञानिक प्रयोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह कृषि, मौसम और आपदा प्रबंधन में भी मददगार होगा।
निष्कर्ष
नेशनल स्पेस डे पर पीएम मोदी का यह संबोधन न केवल भारत की अंतरिक्ष शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता है। एस्ट्रोनॉट पूल की घोषणा और 350 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स का जिक्र यह साबित करता है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय का नेतृत्व कर सकता है।
