छत्तीसगढ़ में एंबुलेंस अभाव के कारण मरीज को परिजनों ने स्ट्रेचर पर अस्पताल तक पहुंचाया। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और सरकारी दावों की पोल खोलती है।
सरगुजा। अंबिकापुरछत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का एक और दर्दनाक दृश्य सामने आया है। एंबुलेंस की उपलब्धता न होने के कारण मरीज के परिजनों को उसे अस्पताल तक स्ट्रेचर पर ढकेलकर ले जाना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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घटना का विवरण
मामला उत्तरी छत्तीसगढ़ के एक सरकारी अस्पताल का है, जहां गंभीर स्थिति में लाए गए मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत थी। लेकिन अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के चलते परिजनों ने मजबूरन मरीज को खुद ही स्ट्रेचर पर धकेलते हुए अस्पताल के मुख्य वार्ड तक पहुंचाया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
परिजनों की पीड़ा
मरीज के परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार एंबुलेंस स्टाफ से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें साफ जवाब मिला कि फिलहाल कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। परिजनों ने कहा कि ऐसे हालात में उन्हें मरीज की जान बचाने के लिए खुद ही यह कदम उठाना पड़ा।
उनका कहना था,
“जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देने का दावा करती है, तब ऐसे हालात बेहद निराशाजनक हैं। एक गंभीर मरीज को स्ट्रेचर पर ढकेलते हुए अस्पताल तक ले जाना हमारी मजबूरी थी, इच्छा नहीं।”
स्थानीय लोगों का गुस्सा
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। एंबुलेंस की अनुपलब्धता, डॉक्टरों की कमी और दवाओं के अभाव जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं।
सरकार के दावे और जमीनी हकीकत
राज्य सरकार समय-समय पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे करती रही है। हाल ही में स्वास्थ्य बजट में भी इजाफा किया गया था। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में नई स्वास्थ्य योजनाएं शुरू करने की घोषणा भी हुई थी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एंबुलेंस की कमी ग्रामीण और छोटे कस्बों में सबसे बड़ी समस्या है।
डॉ. एम. के. शर्मा, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा:
“एंबुलेंस सेवा जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय कर सकती है। यदि मरीज को समय पर अस्पताल न पहुंचाया जाए, तो उसकी जान जाने का खतरा बढ़ जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि केवल योजनाएं और बजट बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनकी सही मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन भी जरूरी है।
सोशल मीडिया पर बहस
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी। ट्विटर और फेसबुक पर लोगों ने स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लिया। कई यूजर्स ने लिखा कि “डिजिटल इंडिया और स्वास्थ्य क्रांति के दौर में भी मरीज को स्ट्रेचर पर घसीटकर ले जाना शर्मनाक है।”
विपक्ष का आरोप
विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ कागजों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत दिखा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालत बेहद खराब है।
सरकार की प्रतिक्रिया
विवाद बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जिस अस्पताल में यह घटना हुई है, वहां एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही संबंधित कर्मचारियों से भी जवाब तलब किया जाएगा।
समाधान की दिशा में
विशेषज्ञों और समाजसेवियों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य में एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत बनाना होगा। हर अस्पताल में पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस तैनात होनी चाहिए। इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों के लिए हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि मरीजों और उनके परिजनों को किस हद तक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार और प्रशासन के लिए यह एक बड़ा सबक है कि केवल योजनाओं और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर तत्काल सुधार लाने होंगे।
