दुर्ग से गिरफ्तार दो ननों को NIA कोर्ट से मिली जमानत, मानव तस्करी के आरोपों में चल रही जांच, कोर्ट ने कड़ी शर्तों पर दी राहत।
दुर्ग, छत्तीसगढ़। मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार की गई दो ननों को NIA कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने शनिवार को दोनों आरोपित ननों को जमानत दे दी। दुर्ग जिले से गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। ननों की गिरफ्तारी से संबंधित मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधीन चल रहा है।
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पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दोनों ननों पर झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से नाबालिग लड़कियों को धार्मिक संस्थानों में जबरन काम कराने और धर्मांतरण के उद्देश्य से तस्करी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद NIA ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की थी।
मामले की पृष्ठभूमि:
मानव तस्करी के इस मामले की शुरुआत तब हुई जब दुर्ग में एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मारकर कुछ लड़कियों को रेस्क्यू किया। पूछताछ में सामने आया कि लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपने माता-पिता से अलग किया गया और एक धार्मिक संस्था में भेजा गया, जहां उन्हें जबरन काम कराया जा रहा था।
इन बयानों और सबूतों के आधार पर पुलिस ने संबंधित संस्था से जुड़ी दो ननों को हिरासत में लिया और NIA को मामले की जानकारी दी। उसके बाद, NIA ने केस को अपने अधीन लिया और हाई-प्रोफाइल केस के रूप में जांच शुरू की।
ननों की दलील:
ननों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है और उन्हें बिना उचित कारण के गिरफ्तार किया गया।
NIA की आपत्ति:
वहीं, NIA के अधिवक्ता ने कोर्ट में जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है। साथ ही, पीड़ित लड़कियों पर दबाव डाला जा सकता है जिससे केस कमजोर हो सकता है।
कोर्ट का फैसला:
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद NIA कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत मंजूर की कि मामले में अभी तक कोई पुख्ता साक्ष्य पेश नहीं किया गया है जो यह साबित करता हो कि आरोपी नन प्रत्यक्ष रूप से मानव तस्करी में शामिल थीं। कोर्ट ने जमानत के लिए कुछ सख्त शर्तें भी निर्धारित की हैं:
- आरोपी बिना अनुमति के राज्य से बाहर नहीं जा सकेंगी।
- जांच अधिकारी को समय-समय पर रिपोर्ट देनी होगी।
- पीड़ितों से किसी भी प्रकार का संपर्क वर्जित रहेगा।
समाज में प्रतिक्रिया:
ननों की गिरफ्तारी के बाद से ही ईसाई समुदाय और मानवाधिकार संगठनों की ओर से विरोध दर्ज किया गया था। इन संगठनों का कहना था कि धार्मिक कार्यों को मानव तस्करी करार देना धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
दूसरी ओर, स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मासूम बच्चों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन की आड़ में तस्करी की जा रही थी, और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या आगे?
हालांकि आरोपी ननों को जमानत मिल गई है, लेकिन NIA की जांच अभी जारी है। कोर्ट ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया है कि वो 60 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच के निष्कर्ष क्या होते हैं और क्या आरोप पत्र में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं।
