छत्तीसगढ़ में अवैध प्लॉटिंग के 369 मामलों में सिर्फ 20 पर केस दर्ज, अब तक किसी बड़े भूमाफिया पर नहीं कस पाया कानून का शिकंजा।
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रायपुर: छत्तीसगढ़ में अवैध प्लॉटिंग और जमीन कब्जा मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन अब तक किसी भी बड़े भूमाफिया पर कठोर कार्रवाई नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से चलाए गए कई अभियान और नोटिस जारी होने के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर असर न के बराबर नजर आ रहा है।
369 प्रकरणों में सिर्फ 20 पर ही केस दर्ज
राज्य के विभिन्न जिलों से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, अब तक अवैध प्लॉटिंग से जुड़े 369 मामलों की जांच की जा चुकी है, लेकिन इनमें से मात्र 20 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई है। शेष मामले या तो कागजों में अटके हुए हैं या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में लटकाए गए हैं। इस प्रकार प्रशासनिक सख्ती का दावा खोखला साबित होता नजर आ रहा है।
भूमाफियाओं को मिल रहा संरक्षण?
स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमाफिया प्रशासनिक एवं राजनीतिक संरक्षण के कारण खुलेआम अवैध कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। बिना किसी अनुमति के जमीन काटी जा रही है और लोगों को भूखंड बेचे जा रहे हैं। कॉलोनाइजर न तो बेसिक सुविधाएं दे रहे हैं, न ही वैध रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई मात्र दिखावा
राजधानी रायपुर सहित दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव और रायगढ़ जैसे शहरों में कई कॉलोनियां बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) की अनुमति के विकसित की जा रही हैं। इन पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन द्वारा गठित टीमें अधिकतर सिर्फ नोटिस भेजने तक सीमित रह जाती हैं। जमीन अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की बजाय, केवल दिखावटी निरीक्षण किए जाते हैं।
राजस्व विभाग भी सवालों के घेरे में
इन मामलों में राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारी भी इन भूमाफियाओं से मिलीभगत रखते हैं, जिससे जांच और कानूनी कार्रवाई को जानबूझकर टाल दिया जाता है। कई बार तो फर्जी रजिस्ट्री और दस्तावेजों के आधार पर भी भूखंड बेच दिए जाते हैं।
सरकार की योजनाएं विफल
राज्य सरकार की ओर से अवैध प्लॉटिंग रोकने के लिए समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। “संपत्ति का पंजीकरण तभी होगा जब टीएंडसीपी की स्वीकृति होगी” जैसी शर्तें भी लागू की गई हैं। लेकिन इन नियमों का पालन शायद ही किसी क्षेत्र में हो रहा है। उल्टा अवैध प्लॉटिंग करने वालों को फायदा हो रहा है, जबकि आम आदमी कानूनी प्रक्रिया में फंस जाता है।
जनता में नाराजगी
इन हालातों से नाराज जनता ने कई बार प्रदर्शन भी किया है। जिन लोगों ने जीवनभर की पूंजी लगाकर जमीन खरीदी है, वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। न तो उनके पास वैध दस्तावेज हैं और न ही उनके प्लॉट पर विकास की कोई गारंटी।
विशेष न्यायालय की मांग
कई सामाजिक संगठनों और रियल एस्टेट विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि भूमाफिया के मामलों की जांच और सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय की व्यवस्था की जाए। साथ ही एक स्वतंत्र जांच एजेंसी की निगरानी में अवैध प्लॉटिंग से जुड़े सभी मामलों की जांच कर आरोपियों को जेल भेजा जाए।
निष्कर्ष के बजाय तर्क
जब तक भूमाफियाओं पर ठोस कानूनी शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक अवैध प्लॉटिंग की समस्या खत्म नहीं हो सकती। केवल छोटे प्लॉट धारकों और बिचौलियों पर कार्रवाई कर देना समाधान नहीं है। जरूरत है कि पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर कठोर दंड सुनिश्चित किया जाए।





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