एनएचएम कर्मचारी संघ ने स्थायीकरण और वेतन वृद्धि की मांगों को लेकर आज से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया। अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप, स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों ने अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी जायज़ मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है। इस आंदोलन के चलते प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
एनएचएम कर्मचारी संघ लंबे समय से स्थायीकरण, वेतन वृद्धि, पदोन्नति और सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद सरकार और विभागीय अधिकारी किसी ठोस कदम तक नहीं पहुँचे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि अधिकारियों ने कई बार उन्हें बैठकों में बुलाकर गुमराह किया लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया।
आंदोलन की शुरुआत
आंदोलन की शुरुआत आज से पूरे प्रदेश में की गई है। कर्मचारी संघ ने सभी जिलों में कार्यस्थल पर ताले लगाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। रायपुर सहित दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव और बस्तर जैसे जिलों में भी कर्मचारियों ने रैलियाँ और नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं, आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
आंदोलन का सीधा असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों के काम बंद करने से टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ और कई अन्य योजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं। मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ न मिलने की चिंता पहले से ही लोगों में दिखाई देने लगी है।
अधिकारियों का पक्ष
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। कई बिंदुओं पर चर्चा जारी है और जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे। हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि यही बात उन्हें पिछले कई महीनों से सुनाई जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
कर्मचारी नेताओं का बयान
एनएचएम कर्मचारी संघ के नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज़ हैं। वे वर्षों से संविदा पर काम कर रहे हैं और स्थायी कर्मचारियों के बराबर काम करने के बावजूद उन्हें समान सुविधाएँ नहीं दी जातीं। वेतन असमानता, प्रमोशन और नौकरी की सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगें पूरी न होना बड़ी चिंता का विषय है।
विपक्ष का समर्थन
विपक्षी दलों ने भी कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जबकि स्वास्थ्य सेवाएँ जनता के जीवन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
आंदोलन का अगला कदम
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसमें राजधानी में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और मुख्यमंत्री निवास घेराव जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।
जनता की चिंता
आंदोलन से आम जनता में चिंता का माहौल है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने को लेकर चिंतित हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
एनएचएम कर्मचारियों का यह अनिश्चितकालीन आंदोलन सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर कब और किस स्तर पर सकारात्मक कदम उठाती है।


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