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छत्तीसगढ़ में 7 अगस्त से मितानिनों की हड़ताल शुरू

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 5 August 2025

छत्तीसगढ़ की मितानिनें 7 अगस्त से हड़ताल पर जाएंगी, मानदेय और नियमितिकरण की मांग को लेकर प्रदेशभर में जोरदार प्रदर्शन करेंगी।

रायपुर, छत्तीसगढ़। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाली मितानिनें अब अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य मितानिन कर्मचारी संघ ने 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। राज्य के सभी संभागों में मितानिनें एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगी और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगी।

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संघ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पिछले कई वर्षों से सरकार के सामने नियमितिकरण, मानदेय वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाओं की मांग रखी जा रही है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। अब महिलाएं तय कर चुकी हैं कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मितानिनों की प्रमुख मांगें

  1. नियमितिकरण: मितानिनों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
  2. मानदेय वृद्धि: वर्तमान में मिलने वाला मानदेय बेहद कम है, जिससे जीवनयापन करना कठिन हो रहा है।
  3. सामाजिक सुरक्षा: बीमा, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे अधिकारों की मांग।
  4. कार्य का सम्मानजनक मूल्यांकन: कोविड काल से लेकर टीकाकरण अभियान तक, मितानिनों ने लगातार अहम भूमिका निभाई है, जिसे सरकार द्वारा नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

प्रदेशभर में होंगी रैलियां

स्वास्थ्य मितानिन संघ ने बताया कि 7 अगस्त को राजधानी रायपुर समेत सभी संभाग मुख्यालयों में रैलियां निकाली जाएंगी। राज्य भर की हजारों मितानिनें प्रदर्शन में शामिल होंगी। रायपुर में धरना स्थल पर प्रदेश स्तरीय नेता उपस्थित रहेंगे।

सरकार का रुख

राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि सरकार मांगों पर विचार कर रही है। हालांकि, मितानिन संघ का कहना है कि इस बार सिर्फ बातचीत से काम नहीं चलेगा—लिखित आदेश चाहिए।

स्वास्थ्य सेवाएं होंगी प्रभावित

मितानिनें गांव-गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का पोषण और बीमारियों की पहचान जैसे काम करती हैं। अगर वे हड़ताल पर जाती हैं, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी।

संगठन की तैयारी

संघ ने बताया कि सभी जिला व ब्लॉक स्तरीय इकाइयों को हड़ताल की सूचना भेज दी गई है। सोशल मीडिया के जरिए भी जागरूकता फैलाई जा रही है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए WhatsApp, Facebook और अन्य प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।

विपक्ष का समर्थन

कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मितानिनों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है। उनका कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत का उचित मूल्य देना चाहिए।

मितानिनें क्या कहती हैं?

बिलासपुर की एक मितानिन रेखा वर्मा ने बताया, “हमने कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर काम किया। तब हमें योद्धा कहा गया, लेकिन आज हम उपेक्षित हैं। अब और चुप नहीं रहेंगे।”

दुर्ग की मितानिन संगीता ठाकुर ने कहा, “मानदेय से घर नहीं चलता। परिवार चलाना कठिन होता जा रहा है। सरकार को हमारी पीड़ा सुननी चाहिए।”

निष्कर्ष

स्वास्थ्य मितानिनों का यह आंदोलन केवल मानदेय का मसला नहीं है, बल्कि सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। आने वाले दिनों में अगर सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है, जिसका असर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा पड़ेगा।

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