रायपुर के निजी अस्पताल पर मेडिकल वेस्ट के अनुचित निस्तारण का आरोप, नगर निगम की जांच में खुलासा, 24 घंटे में सुधार का अल्टीमेटम।
रायपुर।राजधानी रायपुर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल पर मेडिकल वेस्ट को लेकर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। नगर निगम की एक जांच टीम ने मौके पर जाकर जब निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट का उचित तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इस गंभीर चूक के चलते निगम ने अस्पताल प्रबंधन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वे व्यवस्था में सुधार करें, अन्यथा कार्रवाई तय है।
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शिकायत के बाद जांच में हुआ खुलासा
मेडिकल वेस्ट को लेकर शिकायत मिलने के बाद नगर निगम की टीम ने तत्काल एक्शन लिया। टीम ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया, जहां कई जगहों पर खुले में फेंका गया मेडिकल वेस्ट मिला। दस्ताने, सिरिंज, ब्लड बैग्स और इस्तेमाल किए गए अन्य मेडिकल कचरे को खुले में पड़ा देख टीम के अधिकारी नाराज़ हो गए।
नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, “यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि इससे संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। अस्पतालों को मेडिकल वेस्ट निस्तारण के सख्त नियमों का पालन करना होता है, जिसमें ये अस्पताल पूरी तरह विफल रहे हैं।”
24 घंटे का अल्टीमेटम
अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को 24 घंटे का समय दिया है ताकि वे वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था में सुधार करें और निगम को रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यदि तय समय सीमा में सुधार नहीं होता, तो अस्पताल पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानून और नियमों की अनदेखी
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत सभी अस्पतालों और क्लीनिकों को वेस्ट को अलग-अलग रंगों के बायोबिन में अलग करना, उसे समय-समय पर अधिकृत एजेंसी को सौंपना और उसका उचित रिकॉर्ड बनाए रखना अनिवार्य है। लेकिन निरीक्षण में सामने आया कि अस्पताल इस व्यवस्था का पालन नहीं कर रहा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल मिश्रा ने कहा, “मेडिकल वेस्ट में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक तत्व सीधे आम जनता के स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकते हैं। यदि इसे सही ढंग से निस्तारित नहीं किया जाए, तो यह गंभीर महामारी को जन्म दे सकता है।”
स्थानीय नागरिकों में आक्रोश
अस्पताल के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों ने भी मेडिकल वेस्ट को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि अस्पताल में अक्सर गंदगी फैली रहती है और कई बार बच्चों और पशुओं के संपर्क में यह कचरा आता है, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
जब मीडिया ने अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया तो उन्होंने शुरुआत में चुप्पी साधे रखी, लेकिन बाद में एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा कि, “हमें इस मामले की जानकारी मिली है और हम स्थिति की जांच कर रहे हैं। यदि किसी स्तर पर चूक हुई है, तो उसे सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।”
नगर निगम की सख्ती बढ़ी
यह पहला मामला नहीं है जब किसी निजी अस्पताल पर इस तरह की लापरवाही सामने आई हो। नगर निगम ने हाल ही में अन्य अस्पतालों को भी इस संबंध में नोटिस जारी किए थे। निगम आयुक्त का कहना है कि आने वाले दिनों में सभी निजी और सरकारी अस्पतालों का बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन का ऑडिट किया जाएगा।
निगरानी के लिए बनेगी स्थायी समिति
इस घटना के बाद नगर निगम ने घोषणा की है कि एक स्थायी निगरानी समिति का गठन किया जाएगा जो हर सप्ताह अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेगी। इससे मेडिकल वेस्ट के अनुचित निस्तारण को रोका जा सकेगा।
निष्कर्ष में
रायपुर के इस अस्पताल का मामला स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में लापरवाही का एक गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। मेडिकल वेस्ट के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैया न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन को भी खतरे में डालता है। अब देखना होगा कि अस्पताल 24 घंटे के अंदर व्यवस्था सुधारता है या नगर निगम को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ती है।





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