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नन्हीं सांसों को सहारा : लावारिश नवजात को मिला

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 19 August 2025

लावारिश छोड़े गए नवजात को प्रशासन और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने बचाया। विशेष दत्तक गृह में आश्रय देकर मासूम को नया जीवन और सुरक्षित भविष्य मिला।

मुंगेली।  इंसानियत से भरी खबर ने आज शहर को झकझोर दिया। एक नवजात शिशु, जिसे उसकी जन्म देने वाली मां निर्ममता से लावारिश छोड़ गई थी, अब सुरक्षित हाथों में है। प्रशासन और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की तत्परता से नन्हीं जान को नया सहारा मिला और उसे विशेष दत्तक गृह (Special Adoption Agency) में आश्रय दिया गया है।

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लावारिश हालत में मिली मासूम जिंदगी

सूत्रों के अनुसार, यह घटना तब सामने आई जब लोगों ने नवजात शिशु को सड़क किनारे रोते हुए देखा। मासूम की नाजुक हालत ने हर किसी का दिल पसीज दिया। राहगीरों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। मौके पर पहुंची चाइल्डलाइन टीम और स्थानीय पुलिस ने नवजात को सुरक्षित उठाकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया।

डॉक्टरों की टीम ने दी तुरंत चिकित्सा

अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने नवजात का प्राथमिक उपचार किया। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की हालत सामान्य है और समय पर इलाज मिलने से उसका जीवन सुरक्षित है। यह खबर सुनकर अस्पताल में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।

प्रशासन ने बढ़ाया मदद का हाथ

नवजात को बचाने के बाद जिला प्रशासन ने उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के हवाले कर दिया। समिति ने बच्चे को सुरक्षित आश्रय देने का निर्णय लिया और उसे विशेष दत्तक गृह में स्थानांतरित कर दिया। यहां बच्चे की देखभाल और परवरिश की पूरी जिम्मेदारी विशेषज्ञों और देखरेख करने वाले स्टाफ को सौंपी गई है।

विशेष दत्तक गृह में मिलेगा नया जीवन

विशेष दत्तक गृह का मुख्य उद्देश्य ऐसे ही परित्यक्त या अनाथ बच्चों को सुरक्षा, शिक्षा और परिवार का माहौल देना है। यहां बच्चों की देखभाल के साथ-साथ उन्हें गोद लेने की प्रक्रिया भी कानूनी तरीके से आगे बढ़ाई जाती है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में यह नवजात एक जिम्मेदार और प्यार करने वाले परिवार का हिस्सा बन सकेगा।

मानवीय संवेदनाओं ने जगाई उम्मीद

यह घटना समाज में संवेदनाओं और मानवता की मिसाल है। जहां एक ओर मां ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और समाज ने बच्चे को सहारा दिया। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं हमें यह सिखाती हैं कि समाज मिलकर भी किसी मासूम के जीवन को बचा सकता है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारियों ने कहा कि किसी भी नवजात को इस तरह लावारिश छोड़ना न केवल अपराध है बल्कि समाज के लिए भी चिंता का विषय है। उन्होंने अपील की कि यदि किसी महिला को शिशु की देखभाल में असमर्थता महसूस हो तो उसे कानूनी तरीके से चाइल्डलाइन या संबंधित संस्था से संपर्क करना चाहिए।

समाज में बढ़ती जागरूकता की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं तब कम होंगी जब समाज में जागरूकता बढ़ेगी। गर्भवती महिलाओं को उचित परामर्श और सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। साथ ही, उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक देने की प्रक्रिया उपलब्ध है।

दत्तक प्रक्रिया का महत्व

भारत में ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट’ के तहत ऐसे परित्यक्त बच्चों को गोद लेने की व्यवस्था है। इसके लिए विशेष दत्तक गृह और सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) कार्यरत है। इस प्रक्रिया से बच्चों को सुरक्षित परिवार और उज्ज्वल भविष्य मिलता है।

संवेदनशील घटना से निकला बड़ा संदेश

यह घटना केवल एक बच्चे के जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है। इसमें स्पष्ट है कि जिम्मेदारी से भागना अपराध है, लेकिन समाज और प्रशासन मिलकर हर जीवन को बचा सकता है।

नन्हीं सांसों को सहारा देने वाली इस पहल ने न केवल एक मासूम की जिंदगी बचाई, बल्कि यह भी साबित किया कि मानवता अब भी जिंदा है। आने वाले दिनों में यह बच्चा न केवल सुरक्षित माहौल में बड़ा होगा, बल्कि किसी परिवार की जिंदगी भी खुशियों से भर देगा।



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