इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक बेहद विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार गाज़ा पट्टी पर पूरी तरह सैन्य नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, हालांकि वे इस क्षेत्र को दीर्घकालीन शासन के लिए नहीं रखना चाहते।
नेतन्याहू ने यह वक्तव्य Fox News के एक साक्षात्कार में दिया, जहां उन्होंने कहा, “हमारा इरादा गाज़ा पर पूरी नियंत्रण करने का है, लेकिन हम इसे नियंत्रित नहीं रखना चाहते। हमारा उद्देश्य एक सुरक्षा सीमा बनाना है। हम इसे शासित नहीं करेंगे, बल्कि इसे उन अरब ताकतों को सौंपेंगे जो इसे ठीक से शासित कर सकें और हमें खतरा न पहुंचाएं।
यह घोषणा उस समय आई जब इज़राइल की सुरक्षा मंत्रिपरिषद (Security Cabinet) एक संभावित सैन्य अभियान की मंजूरी पर विचार कर रही थी, जिसका उद्देश्य गाज़ा के उन इलाक़ों पर नियंत्रण जमाना था जो अब तक IDF (Israel Defense Forces) के अधीन नहीं थे।
हालांकि नेतन्याहू ने कहा कि यह कब्ज़ा अस्थायी होगा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर सैन्य आक्रमण के रूप में देखा है। अपेक्षित यह है कि इस अभियान में गाज़ा सिटी और अन्य केंद्रीय इलाक़ों को शामिल किया जा सकता है—ऐसा करने पर लगभग 10 लाख नागरिकों के विस्थापन की संभावना जताई जा रही है।
इस प्रस्ताव के खिलाफ IDF के शीर्ष सैन्य नेतृत्व—विशेषकर सेना प्रमुख एyal ज़ामिर—ने भी विरोध जताया है। उनका तर्क है कि अति व्यापक कब्ज़े से इज़राइल एक ऐसे ‘काले गड्ढे’ में फँस सकता है जहाँ उसे लंबी, खून-खराबे वाली और महँगी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
UN सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस संभावित कब्ज़े की तीखी आलोचना की है। UN की चेतावनी है कि इससे गाज़ा में पहले से मौजूद भुखमरी, स्वास्थ्य संकट और मानवीय आपदा और गहराती जाएगी।
इस बीच, गाज़ा की स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मलिन पोषण (malnutrition) से होने वाली मौतों में वृद्धि हो रही है, और अधिकांश अस्पतालों में बच्चे जानलेवा कुपोषण का सामना कर रहे हैं। केवल 1.5% खेती योग्य भूमि उपलब्ध है, जिससे खाद्य असुरक्षा और गहराई से बढ़ रही है।
त्रासदी की छाया में राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। ग़ाज़ा में अभी भी कई बंदी हैं, और उनके परिवार संभावित कब्ज़े के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। संसद और सड़कों पर जनता का आक्रोश देखर ये स्पष्ट हो रहा है कि इस निर्णय का इज़राइल के अंदर व्यापक राजनीतिक प्रभाव हो सकता है।
संक्षेप में:
- नेतन्याहू ने गाज़ा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की योजना की पुष्टि की, लेकिन कहा यह अस्थायी होगा और शासन अरब ताकतों को सौंपा जाएगा।
- प्रस्तावित सैनिक आक्रमण की योजना सुरक्षा कैबिनेट में विचाराधीन है, जिसमें शामिल क्षेत्रों में गाज़ा सिटी भी हो सकता है।
- IDF के शीर्ष नेतृत्व ने इस कदम के संभावित खतरों पर गंभीर आपत्ति जताई है।
- अंतरराष्ट्रीय संगठनों और UN ने कहा है कि यह निर्णय मानवीय संकट को और बढ़ा देगा।
- गाज़ा में पहले से फैली भूखमरी, कुपोषण और मानवीय संकट की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
- इस कदम से इज़राइल के राजनीतिक-आंतरिक हालात और वैश्विक信誉 पर भी असर पड़ सकता है।
