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मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी में भव्य बसंत पंचमी

देश ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 23 January 2026

मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल में बसंत पंचमी का भव्य आयोजन, मां सरस्वती की पूजा, छात्रों की सहभागिता और सांस्कृतिक महत्व पर विशेष कार्यक्रम।

भोपाल | मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी में बसंत पंचमी का पावन पर्व बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरे पुस्तकालय परिसर को विशेष रूप से सजाया गया और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्रीय ग्रंथपाल रत्ना बाधवानी के मार्गदर्शन में हुई। उन्होंने विधि-विधान से पुजारी को आमंत्रित कर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करवाई। इसके बाद पुस्तकालय के समस्त स्टाफ सदस्यों एवं अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की और मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि और सद्बुद्धि की कामना की।

इस अवसर पर रत्ना बाधवानी ने बसंत पंचमी के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी के दिन ही विद्या की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है, जो ज्ञान, कला, संगीत और शिक्षा को समर्पित है।

उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवन के नवचक्र का प्रतीक भी है। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है, जब सर्दियों का अंत और गर्मियों की शुरुआत होती है। इस समय प्रकृति में हरियाली, खेतों में सरसों के पीले फूल और वातावरण में नई ऊर्जा देखने को मिलती है, जो इस पर्व को और भी खास बना देती है।

ग्रंथपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरस्वती पूजन का वास्तविक अर्थ केवल पुस्तकों और कलम की पूजा तक सीमित नहीं है। इसका असली भाव है – विचारों की पवित्रता, वाणी का संयम, आचरण की मर्यादा और अपनी प्रतिभा का समाज के कल्याण के लिए समर्पण। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे ज्ञान को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें, बल्कि समाज की सेवा में भी उसका उपयोग करें।

पूरे कार्यक्रम के दौरान पुस्तकालय परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। सभी ने पीले वस्त्र धारण किए और पीले रंग की वस्तुओं का प्रसाद मां सरस्वती को अर्पित किया। पूजा के उपरांत सभी उपस्थित जनों को प्रसाद का वितरण किया गया।

इस आयोजन को सफल बनाने में ग्रंथपाल निशा बातव, प्रबंधक रचित मालवीय तथा पुस्तकालय के सभी स्टाफ सदस्यों का विशेष योगदान रहा। छात्रों और कर्मचारियों ने मिलकर इस पर्व को एक यादगार और प्रेरणादायक आयोजन में बदल दिया।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने मां सरस्वती से प्रार्थना की कि वे सभी को ज्ञान, विवेक और सदाचार के मार्ग पर सदैव अग्रसर रखें। मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी में मनाया गया यह बसंत पंचमी उत्सव न केवल धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि शिक्षा और संस्कृति के प्रति समर्पण का सुंदर उदाहरण भी बना।

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