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GPS टोल योजना रद्द, अब ANPR-FASTag हाइब्रिड सिस्टम

देश ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 2 August 2025

भारत सरकार ने GPS-आधारित टोल योजना रद्द की, अब ANPR और FASTag के हाइब्रिड सिस्टम से टोल वसूली होगी, सड़क परिवहन मंत्रालय का निर्णय।

नई दिल्ली। भारत सरकार ने नेशनल हाइवेज़ पर टोल वसूली के लिए प्रस्तावित GPS-आधारित सिस्टम को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब इसकी जगह पर ANPR (Automatic Number Plate Recognition) और FASTag पर आधारित हाइब्रिड टोल वसूली प्रणाली को अपनाया जाएगा। यह फैसला केंद्र सरकार ने तकनीकी चुनौतियों और जमीनी अमल की जटिलताओं को देखते हुए लिया है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस नई प्रणाली को लेकर आधिकारिक घोषणा की है और इसे चरणबद्ध रूप से देशभर में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य टोल भुगतान को पारदर्शी, तेज़ और प्रभावी बनाना है, जिससे टोल प्लाज़ा पर जाम और धोखाधड़ी की समस्या को रोका जा सके।


क्या थी GPS आधारित टोल योजना?

GPS आधारित टोल योजना के अंतर्गत, वाहनों में लगे GPS मॉड्यूल के जरिए यह ट्रैक किया जाना था कि वाहन ने कितनी दूरी तय की है और उस आधार पर टोल शुल्क स्वतः काटा जाता। यह प्रणाली डिस्टेंस-बेस्ड टोलिंग की अवधारणा पर आधारित थी, जिससे फिक्स्ड टोल बूथ की आवश्यकता नहीं होती।

लेकिन इस प्रणाली के लिए पूरे देश में GPS डिवाइस की अनिवार्यता, डाटा नेटवर्क की स्थिरता, वाहनों की ट्रैकिंग और रीयल टाइम बिलिंग जैसी जटिलताएं सामने आईं। साथ ही बड़ी संख्या में पुराने वाहनों को GPS से जोड़ना व्यवहारिक रूप से कठिन साबित हुआ।


क्यों अपनाया गया ANPR और FASTag का हाइब्रिड सिस्टम?

सरकार ने अब जिस हाइब्रिड मॉडल को चुना है, उसमें दो प्रमुख तकनीकें शामिल हैं:

  1. FASTag:
    यह एक RFID आधारित टोल भुगतान प्रणाली है, जो पहले से देशभर के अधिकांश टोल प्लाज़ा पर लागू है। वाहन मालिक अपने प्रीपेड FASTag अकाउंट से टोल भुगतान करते हैं।
  2. ANPR (Automatic Number Plate Recognition):
    यह तकनीक कैमरे के माध्यम से नंबर प्लेट को स्कैन करके वाहन की पहचान करती है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि टोल चूकने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा सके।

FASTag के साथ ANPR जोड़ने से उन वाहनों की पहचान भी संभव होगी, जो टोल भुगतान से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट या खराब FASTag का उपयोग करते हैं। यह प्रणाली बिना किसी रुकावट के टोल भुगतान और निगरानी को संभव बनाएगी।


क्या कहता है सरकार का पक्ष?

सड़क परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,
“हमारे देश में GPS टोलिंग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और वाहनों की मानक स्थिति अभी उस स्तर पर नहीं है, जहां इसे पूरी तरह लागू किया जा सके। इसलिए हमने वर्तमान में हाइब्रिड मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे ज्यादा सटीक और प्रभावी टोल वसूली हो सके।”

अधिकारी ने बताया कि भविष्य में GPS टोल प्रणाली पर दोबारा विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल हाइब्रिड प्रणाली ज्यादा व्यवहारिक और सुरक्षित है।


किस तरह काम करेगा नया टोल सिस्टम?

  • टोल प्लाज़ा पर ANPR कैमरे लगाए जाएंगे, जो गुजरने वाले हर वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे।
  • यदि वाहन में सक्रिय FASTag है, तो उससे स्वतः टोल शुल्क कट जाएगा।
  • यदि FASTag काम नहीं करता या बैलेंस नहीं है, तो नंबर प्लेट के आधार पर वाहन मालिक को नोटिस या जुर्माना भेजा जाएगा।
  • यह प्रणाली हर वाहन की एंट्री और एग्जिट पॉइंट को रिकॉर्ड करके डिजिटल ट्रैकिंग भी सुनिश्चित करेगी।

इससे क्या फायदे होंगे?

  1. टोल प्लाज़ा पर रुकावट कम होगी:
    ANPR और FASTag से वाहनों को बिना रोके टोल भुगतान किया जा सकेगा।
  2. धोखाधड़ी में कमी आएगी:
    फर्जी नंबर प्लेट, डुप्लीकेट FASTag और गलत जानकारी से टोल चोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।
  3. व्यवस्था होगी पारदर्शी:
    डिजिटल ट्रैकिंग से भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी होगी और विवादों में कमी आएगी।
  4. कम खर्चीला और तुरंत लागू करने योग्य मॉडल:
    ANPR कैमरे और FASTag पहले से ही लागू हैं, जिन्हें अब सिर्फ एकीकृत करना है।

चुनौतियां और सुझाव

हालांकि यह हाइब्रिड प्रणाली पहले से ज्यादा बेहतर है, लेकिन इसमें भी कुछ चुनौतियां हैं:

  • ANPR की सटीकता:
    भारत में कई वाहन अभी भी फेडेड या गैर-मानक नंबर प्लेट का उपयोग करते हैं, जिन्हें पढ़ना कठिन होता है।
  • फास्टैग बैलेंस की समस्या:
    कई बार तकनीकी या बैलेंस के अभाव में FASTag से पेमेंट नहीं हो पाता।
  • डिजिटल दंड प्रक्रिया:
    ANPR से पहचान के बाद जुर्माना भेजने की प्रक्रिया को सटीक और समयबद्ध बनाना होगा।

सरकार को चाहिए कि वह नंबर प्लेट मानकीकरण, डिजिटल भुगतान जागरूकता और FASTag रिचार्ज प्रक्रिया को और सरल बनाए।


निष्कर्ष

भारत सरकार का GPS आधारित टोल प्रणाली को स्थगित कर ANPR और FASTag आधारित हाइब्रिड प्रणाली को लागू करना एक व्यावहारिक और समयानुकूल निर्णय है। यह प्रणाली न केवल टोल वसूली को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि पारदर्शिता और दक्षता को भी बढ़ाएगी। भविष्य में तकनीकी आधार मजबूत होने पर GPS आधारित प्रणाली को पुनः लागू किया जा सकता है।

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