मृत व्यक्ति के नाम पर अस्पताल संचालित होने का खुलासा, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, प्रशासन ने जांच शुरू की, जनता में आक्रोश और सवाल।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बवाल मच गया है। बस्तर जिले में स्थित ‘मां दंतेश्वरी ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल’ को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह अस्पताल एक मृत व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत होकर संचालित हो रहा है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।
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भाजपा ने इस पूरे मामले को कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार को घेरा है, जबकि कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक त्रुटि बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मृत व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत हॉस्पिटल
सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल का पंजीकरण एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर हुआ है जिसकी मृत्यु कुछ वर्ष पहले हो चुकी है। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी है और सरकारी योजनाओं के तहत भुगतान भी इस पंजीकरण के आधार पर लिए जा रहे हैं। यह मामला सामने आने के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल
भाजपा नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को उजागर किया और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “मृत व्यक्ति के नाम पर अस्पताल चलाना कानून और नैतिकता दोनों का उल्लंघन है। यह न केवल फर्जीवाड़ा है, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है। क्या सरकार जानबूझकर ऐसे तत्वों को संरक्षण दे रही है?”
भाजपा ने कहा कि इस तरह के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य की स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
कांग्रेस ने क्या कहा?
दूसरी ओर, कांग्रेस प्रवक्ताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए कहा कि मामला जांच के दायरे में है। पार्टी के मुताबिक, यदि किसी मृतक के नाम पर पंजीकरण हुआ है, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक है, लेकिन इसे राजनीतिक रंग देना सही नहीं है।
कांग्रेस नेता ने कहा, “हमें भी इस पर आश्चर्य हुआ है। हमने प्रशासन से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लेकिन भाजपा इसे मुद्दा बनाकर राजनीति कर रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।”
प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
बस्तर कलेक्टर कार्यालय ने प्राथमिक रूप से इस मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच समिति गठित कर दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को निर्देश दिया गया है कि वे पंजीयन दस्तावेजों की जांच करें और यह पता लगाएं कि यह गलती कैसे हुई।
प्रशासन के अनुसार, यदि अस्पताल का संचालन मृतक के नाम पर हो रहा है और सरकारी योजनाओं से लाभ भी लिया जा रहा है, तो यह न केवल धोखाधड़ी है बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है।
जनता में रोष
स्थानीय लोगों में इस खुलासे के बाद भारी नाराजगी देखी गई। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन इतने संवेदनशील मामलों में भी लापरवाही बरत रहा है, तो जनता की जान और स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकते हैं।
राजनीतिक उठा-पटक और आगामी चुनाव
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। आगामी पंचायत और निकाय चुनावों से पहले इस मुद्दे ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा हथियार दे दिया है।
भाजपा ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को विधानसभा सत्र में भी उठाएगी और स्वास्थ्य मंत्री से जवाब मांगेगी। वहीं, कांग्रेस को इस घटना से छवि पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
निष्कर्ष
‘मां दंतेश्वरी ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल’ का मृतक व्यक्ति के नाम पर संचालन एक गंभीर लापरवाही और संभवतः आपराधिक कृत्य है। सरकार, प्रशासन और राजनीतिक दलों को इस विषय पर गंभीरता से कदम उठाना होगा, ताकि जनता का विश्वास कायम रह सके।
