रायपुर में चार करोड़ की लागत से बनी गारमेंट फैक्ट्री तीन साल बाद भी बंद है, न रोजगार मिला न संचालन की स्पष्ट समय-सीमा तय हो सकी।
रायपुर। राजधानी रायपुर में रोजगार सृजन के उद्देश्य से स्थापित की गई एक गारमेंट फैक्ट्री सरकारी लापरवाही और योजनागत कमजोरियों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। इस फैक्ट्री के निर्माण और आधारभूत ढांचे पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तीन साल बीत जाने के बावजूद अब तक यहां उत्पादन कार्य शुरू नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि संबंधित विभाग यह भी स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि फैक्ट्री का संचालन आखिर कब शुरू होगा।
जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री का निर्माण स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। भवन, मशीनरी और अन्य संसाधनों पर भारी-भरकम राशि खर्च की गई, लेकिन संचालन के लिए न तो प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति हो सकी और न ही उत्पादन से जुड़ी कोई ठोस कार्ययोजना तैयार की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री के नाम पर सरकारी धन तो खर्च हो गया, लेकिन इसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाया। कई बार अधिकारियों से पूछताछ की गई, पर हर बार जवाब टालमटोल वाला ही मिला। फैक्ट्री परिसर में आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है और मशीनें धूल फांकती नजर आ रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, संचालन एजेंसी के चयन, कच्चे माल की आपूर्ति और विपणन व्यवस्था को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यही कारण है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी फैक्ट्री सिर्फ एक निष्क्रिय भवन बनकर रह गई है।
इस मामले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते फैक्ट्री शुरू नहीं की गई, तो न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं की रोजगार की उम्मीदें भी टूट जाएंगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में कब ठोस कदम उठाता है और यह फैक्ट्री वास्तव में कब उत्पादन शुरू कर पाती है।
