टाटा स्टील चेस टूर्नामेंट में प्रागननंदा की घड़ी बंद होने पर विवाद, मैच ड्रॉ घोषित, राउंड-4 में विश्वनाथन आनंद को हार झेलनी पड़ी।
रायपुर। दुनिया के प्रतिष्ठित शतरंज आयोजनों में शामिल टाटा स्टील चेस टूर्नामेंट में एक बार फिर विवाद ने सुर्खियां बटोरी हैं। भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रागननंदा और अमेरिका के खिलाड़ी के बीच खेले गए मुकाबले में घड़ी बंद होने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया, जिसके बाद मैच को ड्रॉ घोषित कर दिया गया। यह घटना टूर्नामेंट के चौथे राउंड की है, जिसने शतरंज जगत में चर्चा तेज कर दी है।
दरअसल, मुकाबले के अंतिम क्षणों में प्रागननंदा ने अपनी चाल चलते समय घड़ी बंद कर दी। इस दौरान घड़ी में केवल एक सेकेंड का समय शेष था। अमेरिकी खिलाड़ी की ओर से दावा किया गया कि समय समाप्त होने से पहले चाल पूरी नहीं हुई, जबकि भारतीय खेमे का कहना है कि चाल नियमों के अनुसार पूरी की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद निर्णायकों ने स्थिति की समीक्षा की और अंततः मैच को ड्रॉ करार दिया।
इस फैसले से दर्शकों और शतरंज विशेषज्ञों में भी मतभेद देखने को मिले। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी नियमों के तहत चाल समय पर पूरी हुई थी, जबकि अन्य का कहना है कि घड़ी बंद करने में हुई देरी के कारण ड्रॉ का फैसला उचित है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस छिड़ गई है।
टूर्नामेंट के चौथे राउंड में भारत के दिग्गज शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद को भी हार का सामना करना पड़ा। आनंद ने संघर्षपूर्ण मुकाबला खेला, लेकिन अंततः उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी के सामने पराजय स्वीकार करनी पड़ी। यह हार उनके समर्थकों के लिए निराशाजनक रही, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि टूर्नामेंट अभी लंबा है और आनंद वापसी कर सकते हैं।
टाटा स्टील चेस टूर्नामेंट को ‘शतरंज का विंबलडन’ भी कहा जाता है, जहां दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। ऐसे में घड़ी और समय नियंत्रण से जुड़े विवाद टूर्नामेंट की पारदर्शिता और नियमों पर सवाल खड़े करते हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि सभी फैसले अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) के नियमों के अनुसार लिए गए हैं।
प्रागननंदा के लिए यह टूर्नामेंट बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह लगातार शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि इस विवादास्पद ड्रॉ के चलते उन्हें संभावित जीत से संतोष करना पड़ा। आने वाले राउंड्स में उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
शतरंज प्रेमियों की नजरें अब अगले मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय खिलाड़ी इस विवाद से उबरकर किस तरह का खेल दिखाते हैं।
