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मुख्यमंत्री साय ने प्राचार्यों की ऑनलाइन काउंसिलिंग शुरू की

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 20 August 2025

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा विभाग ने पदोन्नत प्राचार्यों की ऑनलाइन काउंसिलिंग शुरू की, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम है।

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है। शिक्षा विभाग द्वारा पदोन्नत प्राचार्यों की ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रक्रिया आज से प्रारंभ कर दी गई। इस पहल को शिक्षक समुदाय और शैक्षिक जगत में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, क्योंकि इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होगी।

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डिजिटलाइजेशन से शिक्षा विभाग में पारदर्शिता

पारंपरिक व्यवस्था में प्राचार्यों की पदस्थापना और काउंसिलिंग प्रक्रिया में अक्सर लंबा समय लगता था, साथ ही इसमें पारदर्शिता की कमी को लेकर प्रश्न उठते थे। मुख्यमंत्री साय ने इस प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाकर एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली की शुरुआत की है। अब पदोन्नत प्राचार्य अपने पदस्थापना स्थान का चयन ऑनलाइन कर पाएंगे, जिससे किसी भी तरह की पक्षपात या अनुचित दबाव की गुंजाइश नहीं रहेगी।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता – शिक्षा और सुशासन

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के विकास की नींव है। प्राचार्यों की पारदर्शी पदस्थापना से विद्यालयों में कार्यकुशलता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक माहौल मिलेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में निरंतर सुधार और तकनीकी नवाचार लागू करना सरकार की प्राथमिकता है।

शिक्षकों में उत्साह

ऑनलाइन काउंसिलिंग की शुरुआत से शिक्षकों और प्राचार्यों में उत्साह का माहौल है। कई प्राचार्यों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे उनके कार्य में सुगमता आएगी और नियुक्ति की प्रक्रिया में विश्वास कायम होगा।

शिक्षा की गुणवत्ता पर सकारात्मक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पारदर्शी प्रक्रिया से शैक्षणिक संस्थानों में स्थिरता आएगी। जब प्राचार्य अपनी पसंद और सुविधा अनुसार स्थान का चयन कर पाएंगे, तो वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन अधिक जिम्मेदारी और संतोष के साथ कर सकेंगे। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार की संभावना है।

भविष्य की दिशा

शिक्षा विभाग की इस पहल से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं को भी डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा सकता है। यह कदम डिजिटल गवर्नेंस और “ई-गुड गवर्नेंस” की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

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