बस्तर में अतिवृष्टि के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।
बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश और अतिवृष्टि ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में घरों को नुकसान पहुँचा, सड़कों और फसलों को भारी नुकसान हुआ। इसके चलते प्रभावित जनता को तत्काल राहत और बचाव कार्यों की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपने विदेश दौरे से लौटते ही तत्काल दंतेवाड़ा पहुंचे और वहां संभागीय बैठक आयोजित की। बैठक में उन्होंने जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित इलाकों में फसलों, घरों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का मूल्यांकन तुरंत किया जाए और प्रभावितों को तत्काल आर्थिक सहायता और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राहत कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन और टास्क फोर्स तैनात किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने इसे और तेज करने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रभावित जनों तक खाद्य सामग्री, दवाइयां और पीने के पानी तुरंत पहुंचाया जाए।
श्री साय ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय प्रशासनिक तत्परता और समय पर निर्णय लेने की क्षमता ही प्रभावित जनता के लिए सबसे बड़ी राहत होती है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय किया जाए और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर दैनिक रिपोर्ट ली जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्यमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया और दंतेवाड़ा में संभागीय बैठक राहत कार्यों की गति को बढ़ाने में मदद करेगी। इससे प्रभावित जनता को जल्द से जल्द राहत मिलेगी और बुनियादी सेवाओं की बहाली संभव होगी।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों की लंबी अवधि की पुनर्वास योजना पर भी काम किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
