गरियाबंद में मितानिन आंदोलन के दौरान NH जाम, पुलिस ने रोका। अध्यक्ष सेंगर ने सरकार पर अत्याचार के आरोप लगाए, स्वास्थ्य मंत्री बोले- मांगें नहीं मान सकते।
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में मितानिनों के आंदोलन ने जोर पकड़ा। आंदोलन में शामिल होने के लिए मितानिनें रायपुर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद नेशनल हाईवे (NH) जाम हो गया और यातायात बाधित हो गया।
मितानिन संगठन की अध्यक्ष सेंगर ने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं के साथ अत्याचार कर रही है और उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना था कि लंबे समय से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं को हल नहीं किया गया है, जिसके चलते यह आंदोलन मजबूरी बन गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार उनकी मांगों को पूरी तरह से मान नहीं सकती है, लेकिन बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा और राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली के लिए कुछ सीमाएं तय करना आवश्यक है।
मितानिनों ने बताया कि उनका आंदोलन सशर्त है और वे अपने हक की लड़ाई के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, और उनके सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के लिए यह आंदोलन जरूरी है।
पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर NH पर बैरिकेड लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कई जगहों पर प्रशासन और मितानिनों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी, लेकिन किसी प्रकार के हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि मितानिन आंदोलन महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भूमिका को उजागर करता है। उनका संघर्ष यह दिखाता है कि स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मान और उचित वेतन तथा सुविधाएं मिलना जरूरी है।
सरकार ने अगले हफ्ते समीक्षा बैठक बुलाने की घोषणा की है। इस बैठक में मितानिन संगठन के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच चर्चा होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि बातचीत के बाद आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त किया जा सकेगा।
