दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ की साक्षी जायसवाल को कला और संस्कृति में योगदान के लिए राष्ट्रीय कल्चुरी गौरव सर्वोच्च सम्मान मिला, प्रदेश में खुशी की लहर।
नई दिल्ली/रायपुर। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में छत्तीसगढ़ की बेटी साक्षी जायसवाल को राष्ट्रीय कल्चुरी गौरव सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें कला, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। साक्षी के सम्मानित होने से पूरे छत्तीसगढ़ में गर्व और उत्साह का माहौल है।
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समारोह का भव्य आयोजन
यह सम्मान समारोह दिल्ली के एक प्रमुख सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से आए कलाकारों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। मंच पर देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की मौजूदगी में साक्षी जायसवाल को शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य लोगों ने कहा कि साक्षी ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है।
साक्षी का योगदान
साक्षी जायसवाल लंबे समय से कला और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। उन्होंने लोककला और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में विशेष भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, वे सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी रही हैं और शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण से संबंधित कई अभियानों का हिस्सा रही हैं।
उनकी यही प्रतिबद्धता और समाज में किए गए योगदान उन्हें इस सर्वोच्च सम्मान के योग्य बनाते हैं।
सम्मान मिलने पर साक्षी की प्रतिक्रिया
सम्मान मिलने के बाद साक्षी जायसवाल ने कहा –
“यह सम्मान मेरे लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा के प्रति देश का सम्मान है। मैं अपने प्रदेश और समाज को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य करती रहूंगी।”
छत्तीसगढ़ में हर्ष की लहर
साक्षी को सम्मानित किए जाने की खबर जैसे ही छत्तीसगढ़ पहुंची, उनके शुभचिंतकों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर उन्हें बधाइयों का तांता लग गया।
राज्य के कई जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने साक्षी को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन किया है।
निष्कर्ष
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के इस समारोह में साक्षी जायसवाल को मिला राष्ट्रीय कल्चुरी गौरव सर्वोच्च सम्मान न केवल उनकी उपलब्धियों का सम्मान है बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और मूल्यों की भी सराहना है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगी।
