बिलासपुर शिक्षा विभाग में सहायक कार्यक्रम समन्वयक पर बाबू से गाली-गलौज और धमकी का आरोप, मामला पुलिस तक पहुंचा, जांच जारी, विभागीय माहौल में तनाव।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग के भीतर गाली-गलौज और धमकी का मामला सामने आया है। विभाग के सहायक कार्यक्रम समन्वयक पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही ऑफिस के बाबू से अभद्र व्यवहार किया और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना से शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है और मामला अब पुलिस तक जा पहुंचा है।
बताया जा रहा है कि विवाद विभागीय कार्यालय के अंदर हुआ, जहां सहायक कार्यक्रम समन्वयक और बाबू के बीच किसी काम को लेकर कहासुनी हो गई। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ी कि आरोप है कि सहायक कार्यक्रम समन्वयक ने गाली-गलौज की और बाबू को धमकाते हुए जान से मारने की बात कह दी। इससे आक्रोशित बाबू ने तुरंत मामले की शिकायत सिविल लाइन थाने में की।
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए धारा अनुसार मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में जुटी
सिविल लाइन थाने की टीम ने दोनों पक्षों से पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दोनों के बीच विभागीय कार्य को लेकर पुरानी खींचतान भी रही है। इस वजह से मामूली विवाद ने बड़ा रूप ले लिया।
विभाग में तनाव
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में भी खौफ और असंतोष का माहौल है। कई कर्मचारियों का कहना है कि अगर कार्यालय में ही इस तरह के व्यवहार होंगे तो विभागीय माहौल बिगड़ना तय है। वहीं, कुछ कर्मचारियों ने इस मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने की बात कही है।
बाबू की शिकायत
शिकायतकर्ता बाबू ने पुलिस को बताया कि सहायक कार्यक्रम समन्वयक ने पहले गाली-गलौज की और उसके बाद जान से मारने की धमकी दी। बाबू का कहना है कि वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
आरोपी की सफाई
दूसरी ओर, सहायक कार्यक्रम समन्वयक ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने जान से मारने की धमकी देने के आरोप को पूरी तरह खारिज किया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने इस विवाद को गंभीर माना है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
सामाजिक असर
यह घटना शिक्षा विभाग जैसे संवेदनशील विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर विभाग का काम बच्चों की शिक्षा और विकास पर केंद्रित है, वहीं कर्मचारियों के बीच ऐसे विवाद प्रशासनिक छवि को धूमिल करते हैं।
आगे की प्रक्रिया
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ होगी कि वास्तव में कार्यालय में क्या हुआ था।
