बिलासपुर के मोपका में तीसरे दिन भी चला बुलडोजर, अवैध प्लाटिंग पर प्रशासन का शिकंजा, 25 मकान और कई बाउंड्री दीवारें तोड़ी गईं।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मोपका क्षेत्र में प्रशासन ने अवैध प्लाटिंग के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। लगातार तीसरे दिन नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 25 मकान और कई बाउंड्री दीवारें ध्वस्त कर दीं। यह कार्रवाई उन जमीनों पर की जा रही है, जहां बिना किसी वैध अनुमति के अवैध रूप से प्लॉट काटे गए थे और निर्माण कार्य किए जा रहे थे।
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तीन दिन से लगातार चल रही कार्रवाई
बिलासपुर नगर निगम की टीम ने मोपका क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान शुरू किया था, जो अब तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासन की यह कार्रवाई सुबह 10 बजे शुरू हुई और देर शाम तक चली। JCB मशीनों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकान और निर्माणाधीन ढांचे तोड़े गए।
25 मकान और दर्जनों बाउंड्री दीवारें ध्वस्त
अधिकारियों के अनुसार, अब तक की गई कार्रवाई में कुल 25 अवैध रूप से निर्मित मकान तोड़े जा चुके हैं। इसके अलावा, कई बाउंड्री वॉल, अवैध रूप से डाली गई सड़कें और निर्माण सामग्री जब्त की गई हैं। ये सभी निर्माण बिना किसी वैध स्वीकृति और मास्टर प्लान के विरुद्ध किए जा रहे थे।
बिना डायवर्जन और नक्शा पास कराए हुए निर्माण
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मोपका क्षेत्र में जिन जमीनों पर प्लॉटिंग की गई थी, वे कृषि भूमि श्रेणी की थीं और उनका डायवर्जन नहीं कराया गया था। इसके बावजूद प्लॉट बेचकर मकान बनाए जा रहे थे। न ही किसी ने नगर निगम से नक्शा पास करवाया और न ही भवन निर्माण की अनुमति ली गई थी।
स्थानीय निवासियों में हड़कंप
कार्रवाई की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों ने अपने मकानों और निर्माण कार्यों को बचाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन सख्त रुख अपनाए रहा। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि उन्हें प्लॉट खरीदते समय वैधता की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी और अब वे अपने आशियाने टूटने से परेशान हैं।
प्रशासन की अपील—प्लॉट खरीदने से पहले जांच करें दस्तावेज
नगर निगम प्रशासन ने एक बार फिर आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि संबंधित भूमि का डायवर्जन हुआ है या नहीं, प्लॉटिंग की अनुमति नगर निगम से ली गई है या नहीं और क्या नक्शा स्वीकृत है।
अवैध प्लाटिंग माफियाओं पर सख्ती
जांच में सामने आया है कि कुछ बिल्डरों और प्लाटिंग माफियाओं ने मिलकर आम नागरिकों को गुमराह करते हुए अवैध रूप से प्लॉट बेच दिए। इनके खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने कई दस्तावेज जब्त किए हैं और बिल्डरों से जवाब-तलब भी किया जा रहा है।
मास्टर प्लान के खिलाफ निर्माण
बिलासपुर का मास्टर प्लान स्पष्ट रूप से तय करता है कि किस क्षेत्र में किस प्रकार का विकास कार्य होना है। मोपका क्षेत्र में जिस स्थान पर निर्माण किया गया, वह ग्रामीण क्षेत्र में आता है और वहां आवासीय उपयोग के लिए अभी तक भूमि का डायवर्जन नहीं किया गया था। इसके बावजूद बेतरतीब तरीके से मकान बनाए गए और सड़कें डाली गईं, जो पूरी तरह अवैध हैं।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। जिन-जिन स्थानों पर बिना अनुमति निर्माण किया गया है, उन सभी पर कार्रवाई की जाएगी। निगम आयुक्त ने बताया कि ऐसे मामलों में न केवल निर्माण गिराया जाएगा, बल्कि संबंधित लोगों से वसूली भी की जाएगी।
निष्कर्ष
बिलासपुर के मोपका क्षेत्र में चल रही बुलडोजर कार्रवाई प्रशासन की कानून व्यवस्था बहाली और नगर नियोजन को दुरुस्त करने की दिशा में एक सख्त कदम है। यह न केवल अवैध प्लाटिंग माफियाओं को चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी सबक है कि जमीन खरीदने से पहले हर पहलू की जांच करें। शासन की सख्ती से आने वाले समय में शहरी विकास अधिक अनुशासित और नियोजित हो सकेगा।
