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करंट से हाथी की मौत, किसान पर कार्रवाई तय

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 1 August 2025

कोरबा में फसल बचाने के लिए बिजली तार लगाने से एक जंगली हाथी की मौत, वन विभाग ने किसान के खिलाफ जांच शुरू की।

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव की एक और दुखद घटना सामने आई है। सोमवार रात एक जंगली हाथी की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब एक किसान ने अपनी फसल की सुरक्षा के लिए खेत के चारों ओर अवैध रूप से बिजली के तार बिछा दिए थे। हादसे के बाद वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित किसान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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हाथी की मौत से इलाके में फैली सनसनी

यह घटना कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत आने वाले मड़वाढोढ़ गांव की है, जहां जंगली हाथियों का झुंड पिछले कुछ दिनों से घूम रहा था। सोमवार देर रात जब यह झुंड खेतों की ओर आया, तो एक हाथी खेत के किनारे बिछे बिजली के तार की चपेट में आ गया। करेंट लगने से हाथी की मौके पर ही मौत हो गई।

किसान ने अवैध रूप से लगाया था बिजली का तार

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि किसान ने बिजली विभाग की अनुमति के बिना ही खेत के चारों ओर बिजली का हाई वोल्टेज तार लगाया था। उसका उद्देश्य जंगली सूअरों और हाथियों से फसल की सुरक्षा करना था। लेकिन यह तरीका न केवल खतरनाक था, बल्कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध भी है।

वन विभाग की टीम ने किया शव का पोस्टमार्टम

हाथी के शव की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मंगलवार सुबह पशु चिकित्सकों की टीम ने हाथी के शव का पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मौत करंट लगने से हुई है। घटना स्थल से बिजली का तार भी बरामद किया गया है, जिसे जब्त कर लिया गया है।

किसान के खिलाफ दर्ज होगा अपराध

कटघोरा डीएफओ ने बताया कि संबंधित किसान के खिलाफ भारतीय वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9 और 51 के तहत अपराध दर्ज किया जाएगा। साथ ही, विद्युत अधिनियम के अंतर्गत भी कार्रवाई होगी क्योंकि किसान ने बिना अनुमति बिजली का उपयोग किया था। दोष सिद्ध होने पर किसान को आर्थिक दंड और कारावास दोनों हो सकते हैं।

हाथियों के मूवमेंट को लेकर पहले से था अलर्ट

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मड़वाढोढ़ सहित आसपास के गांवों में हाथियों के मूवमेंट को लेकर पहले से ही अलर्ट जारी किया गया था। ग्रामीणों को समझाइश भी दी गई थी कि हाथियों से बचने के लिए बिजली या अन्य घातक उपाय न करें। इसके बावजूद किसान द्वारा की गई यह लापरवाही भारी पड़ी।

वन्यजीव संघर्ष का बढ़ता खतरा

छत्तीसगढ़ में इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। वन क्षेत्रों के सिकुड़ने और भोजन-पानी की कमी के चलते हाथी अब मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें या तो हाथियों की मौत हुई है या फिर लोगों की। इससे वन विभाग और सरकार दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

विकलांग हाथी के झुंड से बिछड़ने की आशंका

वन अधिकारियों का यह भी कहना है कि मारा गया हाथी झुंड से बिछड़ा हुआ प्रतीत होता है और संभवतः वह बीमार या घायल भी था। ऐसे हाथी अकेले घूमते हैं और भोजन की तलाश में खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे उनके मारे जाने का खतरा बढ़ जाता है।

संवेदनशील क्षेत्रों में होगी निगरानी तेज

हाथी की मौत के बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र को ‘संवेदनशील ज़ोन’ घोषित कर दिया है और निगरानी बढ़ा दी गई है। ड्रोन कैमरे और गश्त दल तैनात किए गए हैं ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।


निष्कर्ष

कोरबा में करंट की चपेट में आकर हाथी की मौत एक गंभीर और चिंताजनक घटना है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से नुकसानदायक है, बल्कि कानूनन अपराध भी है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि इंसानों की सुरक्षा की चिंता में वन्यजीवों के प्रति संवेदनहीनता बढ़ रही है। समय की आवश्यकता है कि किसानों को वैकल्पिक और सुरक्षित फसल सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जाए और वन्यजीवों की रक्षा के लिए प्रशासन और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।

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