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रायपुर स्टेशन पर अवैध दुकानें, वेंडिंग पर सवाल

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 1 August 2025

रायपुर रेलवे स्टेशन में बिना लाइसेंस और अधिकृत कार्ड के चल रही दुकानें, हो रही अवैध वेंडिंग, रेलवे को हो रहा बड़ा राजस्व नुकसान।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का रेलवे स्टेशन जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है, वहां अव्यवस्था और अवैध गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। ताजा मामला स्टेशन परिसर में बिना लाइसेंस फीस और अधिकृत वेंडिंग कार्ड के संचालित हो रही दुकानों का है, जिनसे न केवल रेलवे को राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा भी खतरे में पड़ रही है।

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बिना अनुमति चल रही हैं दुकानें

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर रेलवे स्टेशन के विभिन्न प्लेटफॉर्मों, एंट्री गेट्स और कॉरिडोर क्षेत्रों में कई दुकानदार बिना वैध लाइसेंस के वर्षों से दुकानें चला रहे हैं। इन दुकानों के पास वेंडिंग परमिट, पहचान पत्र और फीस भुगतान से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं हैं।

रेलवे प्रशासन की ओर से समय-समय पर अभियान चलाने के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आती है। कई दुकानें ऐसे स्थानों पर भी लगाई जा रही हैं, जहां वेंडिंग की अनुमति ही नहीं है।

नियमों की खुलेआम अनदेखी

रेलवे बोर्ड द्वारा वेंडिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इसके अनुसार, किसी भी वेंडर को स्टेशन पर दुकान लगाने से पहले अधिकृत लाइसेंस लेना अनिवार्य है, जिसमें नियमित शुल्क जमा करना और रेलवे द्वारा जारी पहचान पत्र रखना शामिल है। लेकिन रायपुर स्टेशन पर कई वेंडर इन नियमों का उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं।

यात्रियों का कहना है कि यह वेंडिंग रात में भी जारी रहती है, जिससे सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। कई बार चोरी, जेबकटी जैसे मामले सामने आए हैं, लेकिन वेंडिंग पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती।

रेलवे को हो रहा है राजस्व नुकसान

रेलवे को इन अवैध दुकानों से होने वाली कमाई से कोई हिस्सा नहीं मिलता, जिससे विभाग को प्रत्यक्ष राजस्व हानि हो रही है। एक अनुमान के अनुसार, यदि सभी दुकानें वैध रूप से रजिस्टर्ड हों, तो रेलवे को लाखों रुपये की आमदनी हो सकती है।

स्टेशन से जुड़े अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। माना जा रहा है कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह अवैध गतिविधि फल-फूल रही है।

यात्रियों को हो रही असुविधा

अवैध वेंडिंग के कारण यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर चलने तक में परेशानी होती है। कई बार दुकानें प्लेटफॉर्म के रास्ते में लगाई जाती हैं जिससे भीड़ और अव्यवस्था फैलती है। इसके अलावा खाने-पीने के उत्पादों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं क्योंकि इन दुकानों पर कोई स्वास्थ्य प्रमाणन नहीं होता।

यात्री सुनीता वर्मा ने बताया, “स्टेशन पर कई बार हमने देखा कि खाने-पीने की चीजें बिना ढके बेची जा रही हैं, जिनसे बीमारियां फैल सकती हैं।”

रेलवे के नियमों की धज्जियां

भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, प्रत्येक स्टेशन पर वेंडिंग जोन निर्धारित किए जाते हैं और वहां दुकानें लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन रायपुर स्टेशन में इस प्रक्रिया को दरकिनार कर निजी स्वार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है।

रेलवे अधिनियम के तहत अवैध वेंडिंग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। इसके बावजूद स्टेशन परिसर में नियमों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है।

प्रशासन की कार्रवाई—सिर्फ दिखावा?

रेलवे की वाणिज्य शाखा और RPF (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) समय-समय पर चालान या हटाने की कार्रवाई दिखाती है, लेकिन यह केवल औपचारिकता तक सीमित रहती है। कुछ ही दिनों में वे वेंडर दोबारा उसी स्थान पर दुकानें लगाते नजर आते हैं।

मांग—सख्त निगरानी और लाइसेंस प्रणाली

स्थानीय यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि स्टेशन परिसर में पूरी तरह से लाइसेंस आधारित वेंडिंग प्रणाली लागू की जाए और अवैध वेंडिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

निष्कर्ष

रायपुर रेलवे स्टेशन में अवैध वेंडिंग का मसला केवल राजस्व हानि का नहीं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा का भी है। यदि रेलवे प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह अव्यवस्था आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है।

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