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पार्थिव पटेल ने शुभमन गिल का किया समर्थन, कहा- लॉर्ड्स टेस्ट में उनकी आक्रामकता स्वाभाविक, कुछ भी गलत नहीं किया

खेल ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 24 July 2025

पार्थिव पटेल ने शुभमन गिल का समर्थन किया, कहा कि लॉर्ड्स टेस्ट में उनकी आक्रामकता स्वाभाविक थी और उन्होंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की।

नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच में शुभमन गिल के आउट होने और उसके बाद उनके आक्रामक रवैये पर अब टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर और क्रिकेट विश्लेषक पार्थिव पटेल का बयान सामने आया है। उन्होंने गिल के व्यवहार को पूरी तरह स्वाभाविक और जायज बताया है। उनका कहना है कि गिल की आक्रामकता कोई नई बात नहीं है और उन्होंने किसी भी नियम या मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया।

लॉर्ड्स टेस्ट में गिल के आउट होने पर मचा था विवाद

लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान शुभमन गिल को स्लिप में कैच आउट दिया गया था, लेकिन टीवी रिप्ले में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि गेंद जमीन को छू रही थी या नहीं। थर्ड अंपायर ने अंततः गिल को आउट करार दिया, जिससे भारतीय खेमे में असंतोष की लहर फैल गई। गिल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इसके चलते उन पर मैच फीस का एक हिस्सा काटने और चेतावनी देने की कार्रवाई हुई थी।

पार्थिव पटेल ने दी प्रतिक्रिया

पार्थिव पटेल ने The New Indian Express से बातचीत में कहा:

“गिल ने कुछ भी गलत नहीं किया। जब कोई खिलाड़ी ऐसे विवादित फैसले के चलते आउट होता है, तो उसके अंदर निराशा होना स्वाभाविक है। गिल का सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देना इस युग में सामान्य बात है।”

उन्होंने कहा कि गिल शुरू से ही एक आक्रामक स्वभाव के खिलाड़ी रहे हैं और यह उनकी शैली का हिस्सा है। इस तरह का आक्रामक रवैया कई बार टीम के लिए फायदेमंद भी होता है क्योंकि यह खिलाड़ी को आत्मविश्वास देता है और विपक्ष पर दबाव बनाता है।

आक्रामकता: आज के क्रिकेट की नई परिभाषा?

विराट कोहली, ऋषभ पंत, हार्दिक पंड्या जैसे कई भारतीय खिलाड़ी अब मैदान पर आक्रामक रुख अपनाते हैं, और शुभमन गिल उसी परंपरा के हिस्से हैं। पार्थिव पटेल का मानना है कि यह बदलाव भारतीय क्रिकेट की मानसिकता में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।

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“क्रिकेट अब भावनाओं से भरा खेल बन चुका है। जब खिलाड़ी मैदान पर खुद को पूरी तरह झोंकते हैं, तो भावनाएं आना स्वाभाविक है। इसका मतलब यह नहीं कि वह अनुशासनहीन हैं,” पटेल ने जोड़ा।

सोशल मीडिया की भूमिका

गिल द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट करना कुछ लोगों को अनुचित लगा, लेकिन पार्थिव पटेल ने इसे आज के समय की स्वाभाविक अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी अपनी भावना और विचार खुलकर जाहिर करते हैं।

युवा खिलाड़ियों के लिए यह एक सीख

पार्थिव ने यह भी कहा कि गिल के लिए यह घटना एक सीख है — कि भविष्य में ऐसी स्थितियों में कैसे खुद को संभालना है। उन्होंने कहा कि इस तरह की परिस्थितियों से गुजरने के बाद खिलाड़ी और भी मजबूत और परिपक्व बनता है।

“हर बड़ा खिलाड़ी ऐसे मोड़ों से गुजरता है। यह गिल के लिए एक सीख है और मुझे पूरा भरोसा है कि वह इससे आगे निकलकर और मजबूत बनकर उभरेंगे।”

अंपायरिंग पर लगातार उठ रहे सवाल

हाल के वर्षों में क्रिकेट में अंपायरिंग के स्तर और थर्ड अंपायर के फैसलों पर कई बार सवाल उठे हैं। इस मामले में भी तकनीकी स्पष्टीकरण के बावजूद निर्णय विवादास्पद रहा। पार्थिव पटेल ने कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए अधिक स्पष्ट दिशानिर्देश और पारदर्शिता की आवश्यकता है।


🔹 निष्कर्ष:

शुभमन गिल पर उठे विवाद के बीच पार्थिव पटेल की टिप्पणी युवा खिलाड़ियों के समर्थन में एक मजबूत संदेश है। उन्होंने कहा कि खेल के प्रति जुनून और स्वाभाविक प्रतिक्रिया को अनुशासनहीनता नहीं कहा जाना चाहिए। गिल की आक्रामकता आज के दौर के क्रिकेट की सामान्य शैली का हिस्सा है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

पटेल का यह बयान न सिर्फ गिल के लिए, बल्कि सभी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।




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