रायपुर में 50 करोड़ से बना वर्ल्ड क्लास सरकारी रेजिडेंशियल स्कूल नहीं खुलेगा, भवन को निजी संस्थान को देने की तैयारी से शिक्षा पर सवाल।
रायपुर। राजधानी रायपुर में वर्ल्ड क्लास सरकारी रेजिडेंशियल स्कूल खोलने का सपना अब साकार होता नजर नहीं आ रहा है। लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया अत्याधुनिक भवन अब निजी हाथों में सौंपे जाने की तैयारी में है। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
करोड़ों की लागत, पर उद्देश्य अधूरा
राज्य सरकार द्वारा रायपुर में एक विश्वस्तरीय सरकारी आवासीय विद्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत आधुनिक कक्षाएं, हॉस्टल, खेल सुविधाएं, लैब और स्मार्ट क्लासरूम जैसी व्यवस्थाएं की गईं। भवन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी स्कूल का संचालन शुरू नहीं हो सका। वर्षों से यह भवन उपयोग के अभाव में बंद पड़ा है।
निजी हाथों में देने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक अब सरकार इस भवन को निजी संस्थान या निजी शैक्षणिक समूह को देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए लीज या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विचार किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि लंबे समय से भवन खाली पड़ा है, जिससे रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च हो रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों की आपत्ति
शिक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य से जनता के टैक्स का पैसा खर्च किया गया, वह पूरा नहीं हुआ। यदि निजी संस्थान को दिया गया तो गरीब और मेधावी छात्रों को मिलने वाला अवसर छिन जाएगा।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर सरकारी शिक्षा को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए यह फैसला आवश्यक है।
भविष्य पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह स्कूल शुरू होता तो रायपुर सहित आसपास के जिलों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलता। अब निजी हाथों में जाने से आम जनता को इसका सीधा फायदा मिलना मुश्किल होगा।
