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महिला संविदा कर्मचारियों की मातृत्व वेतन में जीत

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 18 August 2025

महिला संविदा कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का वेतन मिलेगा, हाईकोर्ट की फटकार के बाद शासन ने जारी किया आदेश, कर्मचारियों में खुशी की लहर।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त फटकार के बाद शासन ने महिला संविदा कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश वेतन मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। लंबे समय से विवादित रहने वाले इस मामले में संविदा महिला कर्मचारियों की मांगें आखिरकार मान ली गई हैं, जिससे उन्हें उनके मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन मिलने की मंजूरी मिल गई है।

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सूत्रों के अनुसार, कई संविदा महिला कर्मचारियों ने मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन न मिलने की समस्या को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने शासन को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि संविदा महिला कर्मचारियों के अधिकारों की उपेक्षा नहीं की जा सकती और उन्हें उनके मातृत्व अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आदेश जारी किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि संविदा महिला कर्मचारियों को उनके मातृत्व अवकाश के दौरान सभी बकाया वेतन के भुगतान किए जाएंगे। इस निर्णय से संविदा महिला कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

महिला संविदा कर्मचारियों का कहना है कि यह निर्णय उनके लिए एक लंबी लड़ाई का परिणाम है। कई कर्मचारियों ने कहा कि पहले उन्हें वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब यह न्यायसंगत निर्णय उन्हें और उनके परिवार को राहत देगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि संविदा कर्मचारियों के मातृत्व वेतन का मामला न केवल कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा है बल्कि महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला अन्य राज्यों में भी संविदा महिला कर्मचारियों के हित में मिसाल कायम कर सकता है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें। साथ ही, भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संविदा कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश के नियमों और भुगतान प्रक्रिया को और स्पष्ट किया जाएगा।

राज्य महिला संविदा कर्मचारी संघ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह न्यायालय और प्रशासन की संयुक्त पहल का परिणाम है। उन्होंने भविष्य में भी कर्मचारियों के अधिकारों के लिए सतत जागरूकता और संघर्ष जारी रखने की बात कही।

इस फैसले से संविदा महिला कर्मचारियों के हित में सकारात्मक संदेश गया है कि न्याय और प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से उनके अधिकारों की रक्षा की जा सकती है।

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