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कलेक्ट्रेट में महिला का हाई-वोल्टेज ड्रामा, आत्महत्या प्रयास

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 14 August 2025

कलेक्ट्रेट में महिला ने 40 साल से जमीन के हक के लिए भटकते-भटकते रस्सी लेकर आत्महत्या की कोशिश की, समय रहते पुलिस ने बचाया।

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के एक कलेक्ट्रेट कार्यालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला रस्सी लेकर आत्महत्या करने पहुंच गई। महिला का आरोप है कि वह पिछले 40 साल से अपनी पैतृक जमीन के हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिला।

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घटना का विवरण

गुरुवार को दोपहर के समय कलेक्ट्रेट के गेट पर 60 वर्षीय महिला रस्सी लेकर पहुंची। उसने गेट के पास खंभे से रस्सी बांधने की कोशिश की। वहां मौजूद पुलिस और कर्मचारियों ने तत्काल उसे रोक लिया और सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

महिला का आरोप

महिला का कहना है कि उसके पूर्वजों की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है और वह लगातार शिकायतें कर रही है। कई बार कलेक्टर से मिलने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उसने कहा, “मैं बूढ़ी हो गई, लेकिन मेरी जमीन का हक मुझे नहीं मिला। अधिकारी केवल फाइल आगे बढ़ाने का आश्वासन देते हैं।”

सरकारी दफ्तरों के चक्कर

महिला के अनुसार, उसने तहसील, पटवारी, राजस्व कार्यालय और जिला मुख्यालय के कई अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन हर बार सिर्फ तिथि आगे बढ़ाई जाती रही। उसका कहना है कि 40 साल में उसने हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन न्याय नहीं मिला।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

घटना के बाद कलेक्टर ने महिला की शिकायत सुनी और जांच के आदेश दिए। कलेक्ट्रेट प्रबंधन का कहना है कि महिला की समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा और संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस की भूमिका

पुलिस ने मौके पर तैनात जवानों की सतर्कता को सराहा, जिन्होंने समय रहते महिला को आत्महत्या से रोका। इस मामले में आत्महत्या के प्रयास की कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई भी की जा रही है।


गवाहों की प्रतिक्रिया

मौके पर मौजूद एक व्यापारी ने कहा, “इतने सालों तक न्याय न मिलना दुखद है, सरकार को ऐसे मामलों में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।”


जमीन विवाद के मामले

प्रदेश में इस तरह के जमीन विवाद के मामले आम हैं, जहां पीड़ित को न्याय पाने के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों के लिए तेज और पारदर्शी समाधान की जरूरत है।


निष्कर्ष

यह घटना सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों लोगों की कहानी है, जो जमीन, मुआवजा या हक के लिए दशकों से सरकारी प्रक्रिया में फंसे हुए हैं।

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