अप्रैल में ही रायपुर में जल संकट गहराया, लो प्रेशर, सूखे बोरवेल, गिरता भूजल, टैंकरों पर निर्भर लोग, गर्मी बढ़ने से हालात और गंभीर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही जल संकट गहराने लगा है। शहर के कई इलाकों में पानी का लो प्रेशर, सूखते बोरवेल और तेजी से गिरते भूजल स्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गर्मी के चरम पर पहुंचने से पहले ही हालात ऐसे बन गए हैं कि हजारों परिवार टैंकरों के भरोसे पानी जुटाने को मजबूर हैं।
लो प्रेशर से लोगों की बढ़ी परेशानी
शहर की कई कॉलोनियों में नलों से पानी का प्रेशर बेहद कम हो गया है। सुबह के समय जल आपूर्ति होने के बावजूद लोगों की टंकियां नहीं भर पा रही हैं। कई परिवारों को मोटर चलाकर पानी खींचना पड़ रहा है, जिससे बिजली खर्च भी बढ़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले 20 से 30 मिनट में टंकी भर जाती थी, लेकिन अब एक से दो घंटे तक मोटर चलाने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। इससे दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों को पीने के पानी के लिए अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है।
सूखते बोरवेल ने बढ़ाई चिंता
जल संकट की बड़ी वजह शहर में सूखते बोरवेल भी हैं। कई कॉलोनियों में निजी और सामुदायिक बोरवेल ने पानी देना बंद कर दिया है। जहां पानी मिल रहा है, वहां भी जलस्तर काफी नीचे चला गया है।
जल विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ती गर्मी ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। बीते कुछ वर्षों में कम बारिश और तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों ने भी भूजल पर दबाव बढ़ाया है।
टैंकरों की मांग बढ़ी
जल संकट के चलते शहर में टैंकरों की मांग तेजी से बढ़ गई है। कई इलाकों में लोगों को दो-दो दिन तक टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। निजी टैंकरों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
पहले जहां एक टैंकर 500 से 800 रुपये में मिल जाता था, वहीं अब इसकी कीमत 1000 से 1500 रुपये तक पहुंच गई है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है।
हैंडपंप भी दे रहे जवाब
शहर के कई इलाकों में हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं। कुछ जगहों पर हैंडपंप से बेहद कम पानी निकल रहा है, जबकि कई हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे लोगों को दूर-दराज इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है।
गर्मी बढ़ने से और बिगड़ सकते हैं हालात
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। तापमान बढ़ने के साथ ही पानी की मांग भी बढ़ेगी। ऐसे में मई-जून में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी से पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले महीनों में शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन की तैयारी पर सवाल
जल संकट को लेकर प्रशासन ने आवश्यक इंतजाम होने का दावा किया है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। नागरिकों का कहना है कि टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए और जल आपूर्ति नियमित की जाए।
प्रशासन का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या अधिक है, वहां टैंकर भेजे जा रहे हैं। साथ ही अतिरिक्त जल स्रोतों की तलाश की जा रही है।
जल संरक्षण पर जोर
विशेषज्ञों का कहना है कि जल संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक उपाय जरूरी हैं। वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पानी के सीमित उपयोग पर ध्यान देना होगा।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया जाए
- भूजल रिचार्ज सिस्टम बनाए जाएं
- पाइपलाइन लीकेज पर नियंत्रण किया जाए
- पानी का दुरुपयोग रोका जाए
नागरिकों की मांग
- नियमित जल आपूर्ति
- टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए
- नए बोरवेल की व्यवस्था
- जल संरक्षण अभियान चलाया जाए
स्थिति गंभीर, समाधान जरूरी
अप्रैल में ही गहराते जल संकट ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल लोग हर बूंद बचाने की कोशिश कर रहे हैं और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।





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