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राजधानी दिल्ली में 200 से ज्यादा सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का दावा, अब क्या करेगी सरकार?

राज्य ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 6 September 2024

नई दिल्ली
 वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संसद की समिति को केंद्र सरकार के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में 200 से ज्यादा प्रॉपर्टी, जो दो अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के कंट्रोल में थीं, उन्हें वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया गया है। शहरी विकास और सड़क परिवहन सचिव और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने दूसरे मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त समिति को अपनी बातें बताईं।

विपक्षी सदस्यों ने सचिवों से सवाल किया कि जब रेल मंत्रालय जैसे मंत्रालयों के पास खुद के नियम और ट्रिब्यूनल हैं, तो फिर ऐसे बिल की क्या जरूरत है? सूत्रों ने बताया कि विपक्षी सदस्यों ने अधिकारियों से पूछा कि कई सरकारी एजेंसियों ने वक्फ बोर्ड के साथ जमीन के विवाद से जुड़े केस जीते हैं और जमीन भी उनके कब्जे में है। तो फिर इस बिल की क्या जरूरत है? सूत्रों ने बताया कि विपक्षी सदस्यों ने तीनों मंत्रालयों के अधिकारियों से बिल के नियमों के बारे में सवाल पूछे क्योंकि ये नियम उनके मंत्रालयों के कुछ कानूनों को खत्म कर सकते हैं।

दिए गए ये सुझाव

सूत्रों ने बताया कि विपक्ष के जवाब में, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सुझाव दिया कि उन्हें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वक्फ की संपत्ति का इस्तेमाल धार्मिक और कल्याणकारी कामों के लिए हो, न कि निजी फायदे के लिए। सूत्रों ने बताया कि दुबे ने कहा कि कुछ संपत्ति वक्फ संपत्ति के बजाय शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत भी आ सकती है। वहीं शहरी विकास मंत्रालय ने सुझाव दिया कि दिल्ली की नई राजधानी बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण ब्रिटिश काल (1911-1912 में) के दौरान किया गया था, लेकिन बाद में, दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अधिग्रहित संपत्तियों में से कई को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया, जिसके कारण कई अदालती मामले सामने आए। वक्फ संपत्ति घोषित की गई संपत्तियों में भूमि और विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के नियंत्रण में 108 संपत्तियां और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के नियंत्रण में 138 संपत्तियां शामिल हैं।

राष्ट्रीय राजधानी के निर्माण के लिए कुल 341 वर्ग किलोमीटर भूमि का अधिग्रहण किया गया था और प्रभावित व्यक्तियों को उचित मुआवजा दिया गया था, इस दावे का सदस्यों ने विरोध किया था। सदस्य यह भी चाहते थे कि सरकार यह पता लगाए कि क्या दिल्ली में संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड द्वारा किए गए दावे 1954 के वक्फ अधिनियम में निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद किए गए थे।

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