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ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से जुड़कर शुरुआत की

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 4 August 2025

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से जुड़कर ग्रामीणों ने नई क्रांति की शुरुआत की, अपने हक, सम्मान और अधिकारों के लिए आंदोलन का बिगुल बजाया।

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में बदलाव की लहर शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जुड़कर सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्रांति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब वे अपनी पहचान, अधिकार और सम्मान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।


क्रांति की जमीनी शुरुआत

हाल ही में जिले के कई गांवों में हुई बैठकों में युवाओं, किसानों, मजदूरों और महिलाओं ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से जुड़ने का ऐलान किया। इन बैठकों में स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की गई और यह तय किया गया कि अब सिर्फ वादों पर भरोसा नहीं किया जाएगा, बल्कि जनसंगठन के जरिए हक की लड़ाई लड़ी जाएगी।


जनता की आवाज़ बनी क्रांति सेना

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना न केवल एक संगठन है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ी अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से उपेक्षित छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति, बेरोजगारी, विस्थापन और शोषण जैसे मुद्दों पर अब खुलकर आवाज़ उठाई जाएगी।


ग्राम पंचायत स्तर पर इकाइयों का गठन

सेना द्वारा गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ा जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर इकाइयों का गठन, लोगों को संविधानिक अधिकारों की जानकारी और सरकारी योजनाओं की निगरानी जैसे कार्य किए जा रहे हैं।


युवा शक्ति बनी संगठन की रीढ़

गांव के युवा संगठन से जुड़कर बेरोजगारी, शिक्षा, और नशा मुक्ति जैसे विषयों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि सरकारी योजनाएं तब ही सफल होंगी जब स्थानीय लोग जागरूक और संगठित होंगे।


महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी

इस बार बदलाव की लहर में महिलाएं भी बड़ी संख्या में आगे आई हैं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि जमीन पर आंदोलन से आएगा। पंचायतों में पारदर्शिता और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर अब संगठन के माध्यम से लड़ाई लड़ी जाएगी।


नेतृत्व ने कहा – यह है असली जनक्रांति

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रांतीय संयोजकों ने कहा, “यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि जन-जागरण की क्रांति है। हम किसी पार्टी के नहीं, छत्तीसगढ़ के हैं। हमारी मांग है– स्थानीय लोगों को अधिकार, रोजगार में प्राथमिकता, और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा।”


क्या है प्रमुख मांगें

  • सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में स्थानीय भाषा और संस्कृति आधारित नीति
  • खनिज वनों पर ग्रामसभा का नियंत्रण
  • छत्तीसगढ़ी भाषा को राज्य की राजभाषा बनाने की मांग
  • विस्थापितों का पुनर्वास और मुआवजा

भविष्य की योजना – हर गांव, हर युवा तक पहुंच

संगठन ने आगामी महीनों में हर ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सदस्यता अभियान, जनसंवाद यात्रा और सामूहिक रैलियों की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य है छत्तीसगढ़ के हर नागरिक तक अपनी बात पहुंचाना और उन्हें सक्रिय नागरिक बनाना।

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