सोमवार, 14 सितंबर 2026
ताज़ा खबर
Advertisement

छत्तीसगढ़ में माओवादियों का कहर, दो ग्रामीणों की हत्या

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 3 September 2025

छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने दो ग्रामीणों की हत्या की। महिला की गुहार के बावजूद पति को मौत के घाट उतार दिया। गांव में दहशत का माहौल।

जगदलपुर। सुकमा .छत्तीसगढ़ में माओवादियों की गतिविधियाँ लगातार दहशत फैला रही हैं। एक बार फिर इस नक्सली हिंसा ने निर्दोष ग्रामीणों की जान ले ली। ताजा घटना में माओवादियों ने 2 ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया। घटना के दौरान एक महिला ग्रामीण ने गिड़गिड़ाते हुए कहा – “पति की जान मत लो, छोड़ दो उसे…” लेकिन माओवादी नहीं माने और उसकी आंखों के सामने उसके पति की निर्मम हत्या कर दी।

घटना का विवरण

मिली जानकारी के अनुसार, यह वारदात छत्तीसगढ़ के सुदूरवर्ती नक्सल प्रभावित इलाके में हुई। माओवादियों ने देर रात गांव में धावा बोला और दो ग्रामीणों को अगवा कर लिया। ग्रामीणों पर पुलिस को सूचना देने का आरोप लगाया गया। अगली सुबह ग्रामीणों के शव बरामद हुए, जिन पर गोली और धारदार हथियारों के निशान पाए गए।

प्रत्यक्षदर्शियों का बयान

गांव वालों ने बताया कि घटना के वक्त महिलाएं और बच्चे मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन बंदूकधारी माओवादी पूरी तरह बेरहम थे। एक महिला अपने पति को बचाने के लिए माओवादियों के पैरों पर गिरी, मगर उसकी पुकार का कोई असर नहीं हुआ।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे। इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया और माओवादियों की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से नक्सलियों की पहचान कर उन्हें जल्द पकड़ने का प्रयास किया जाएगा।

लगातार बढ़ती नक्सली हिंसा

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से नक्सली हिंसा गंभीर समस्या बनी हुई है। सुरक्षा बलों के अभियानों के बावजूद माओवादी ग्रामीणों को निशाना बनाकर आतंक का वातावरण बनाए रखते हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि आम लोग सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।

स्थानीय लोगों में दहशत

गांव में इस वारदात के बाद मातम और भय का माहौल है। लोग रात में बाहर निकलने से डर रहे हैं। ग्रामीण संगठनों ने सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है।

सरकार की चुनौती

राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नक्सलियों की जड़ को खत्म करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास योजनाओं को तेज करना होगा ताकि ग्रामीणों को नक्सलियों से दूर रखा जा सके।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर माओवादी हिंसा की残酷 तस्वीर सामने रख दी है। मासूमों की हत्या ने न केवल गांव में, बल्कि पूरे राज्य में भय का माहौल बना दिया है। सवाल यह है कि निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने वाली इस हिंसा पर कब तक रोक लगेगी और राज्य को माओवादी आतंक से कब मुक्ति मिलेगी?


संबंधित खबरें

अपनी प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version