AIIMS दिल्ली, भुवनेश्वर, रायपुर और ऋषिकेश से बड़ी संख्या में डॉक्टरों के इस्तीफे, कम वेतन, संसाधनों की कमी और निजी क्षेत्र के आकर्षण को बताया गया कारण।
रायपुर। देश के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से बड़ी संख्या में डॉक्टरों के इस्तीफे ने चिकित्सा जगत और स्वास्थ्य मंत्रालय को चिंता में डाल दिया है। दिल्ली, भुवनेश्वर, रायपुर और ऋषिकेश जैसे बड़े AIIMS परिसरों में बीते कुछ वर्षों में दर्जनों डॉक्टरों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है। यह आंकड़े एक चिंताजनक ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि देश की शीर्ष चिकित्सा संस्थाएं भी ‘ब्रेन ड्रेन’ और कार्यस्थल असंतोष जैसी चुनौतियों से अछूती नहीं हैं।
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दिल्ली से लेकर रायपुर तक इस्तीफों का सिलसिला
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, केवल AIIMS दिल्ली में पिछले दो वर्षों में दर्जनों डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, भुवनेश्वर, रायपुर और ऋषिकेश AIIMS में भी इस्तीफों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसमें वरिष्ठ रेजिडेंट, असिस्टेंट प्रोफेसर और यहां तक कि कुछ विभागाध्यक्ष स्तर के डॉक्टर भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन डॉक्टरों में से कई विदेशों में बेहतर अवसर तलाशने निकल गए, जबकि कुछ ने निजी अस्पतालों में शामिल होना पसंद किया।
इस्तीफों के पीछे की मुख्य वजहें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं—
- कम वेतन और बेहतर पैकेज का आकर्षण:
निजी अस्पताल और विदेशों में मिलने वाले पैकेज AIIMS की तुलना में कई गुना अधिक हैं। - वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी:
सरकारी मेडिकल संस्थानों में लंबे समय तक ड्यूटी और सीमित छुट्टियों के कारण डॉक्टरों को मानसिक और शारीरिक थकान का सामना करना पड़ता है। - इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की कमी:
कुछ AIIMS परिसरों में अब भी आवश्यक मेडिकल उपकरण और स्टाफ की कमी है, जिससे कार्य में बाधा आती है। - प्रशासनिक दबाव और प्रमोशन में देरी:
प्रमोशन पॉलिसी की जटिलता और प्रशासनिक दवाब भी डॉक्टरों के असंतोष का एक बड़ा कारण है।
AIIMS दिल्ली में स्थिति
AIIMS दिल्ली, जिसे देश का शीर्ष चिकित्सा संस्थान माना जाता है, में भी इस्तीफों का यह ट्रेंड देखने को मिल रहा है। संस्थान में काम करने वाले एक सीनियर डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया—
“यहां अवसर बहुत हैं, लेकिन लंबे समय तक ओवरटाइम, सीमित वेतन वृद्धि और बेहतर सुविधाओं की कमी के कारण कई युवा डॉक्टर निजी क्षेत्र या विदेश का रुख कर रहे हैं।”
AIIMS भुवनेश्वर और रायपुर की चुनौतियां
AIIMS भुवनेश्वर और रायपुर में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहां के डॉक्टरों का कहना है कि मेट्रो शहरों से दूर होने के कारण, विशेषज्ञ डॉक्टरों को बनाए रखना कठिन हो रहा है। पारिवारिक कारणों और बेहतर शिक्षा सुविधाओं की कमी भी उनके फैसले में भूमिका निभाती है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों का नौकरी छोड़ना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर डाल सकता है। मरीजों के इलाज में देरी, विशेषज्ञ सेवाओं की कमी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में गिरावट जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
सरकार और AIIMS प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि डॉक्टरों को बनाए रखने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें वेतन संरचना में सुधार, प्रमोशन प्रक्रिया को सरल बनाने और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
AIIMS प्रशासन का कहना है कि वे डॉक्टरों के लिए रिसर्च अवसरों को बढ़ा रहे हैं, साथ ही नई तकनीक और उपकरणों से अस्पतालों को लैस किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और AIIMS प्रशासन तुरंत ठोस कदम नहीं उठाते, तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि डॉक्टरों को सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुविधाएं और पेशेवर विकास के अवसर भी चाहिए।
निष्कर्ष
AIIMS जैसी शीर्ष संस्थानों से डॉक्टरों का इस्तीफा देना न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा के लिए खतरा है, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी गंभीर चुनौती है। इसे रोकने के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां, उचित वेतन और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना समय की मांग है।
