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कचरे का पहाड़ बढ़ता रहा, अब सरकार सक्रिय

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 19 December 2025

रायपुर में कचरे का पहाड़ वर्षों तक बढ़ता रहा, अब हालात गंभीर होने पर सरकार सक्रिय हुई, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और निपटान के निर्देश जारी।

रायपुर। राजधानी रायपुर में वर्षों से बनते जा रहे कचरे के पहाड़ ने आखिरकार सरकार को मैदान में उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। शहर के विभिन्न इलाकों, खासकर डंपिंग यार्ड क्षेत्रों में कचरे का अंबार न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा बन चुका था, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा था। सवाल यह है कि जब समस्या लंबे समय से सामने थी, तब तक जिम्मेदार संस्थाएं क्यों मूकदर्शक बनी रहीं?

शहर में रोजाना सैकड़ों टन कचरा निकलता है, लेकिन उसके वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था समय पर नहीं की गई। नगर निगम स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की योजनाएं कागजों तक सीमित रहीं। नतीजा यह हुआ कि डंपिंग साइट्स पर कचरे के पहाड़ खड़े हो गए, जिनसे दुर्गंध, जहरीली गैसें और आग लगने की घटनाएं आम होती चली गईं। बरसात के मौसम में यही कचरा नालों में बहकर जलभराव और बीमारियों की वजह बना।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कई बार विरोध प्रदर्शन और शिकायतें कीं, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव रहा। अब जब हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे और पर्यावरणीय खतरे की चेतावनी बढ़ी, तब राज्य सरकार ने सीधे हस्तक्षेप करने का फैसला लिया है। सरकार ने नगर निगम और शहरी विकास विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कचरा प्रबंधन के लिए त्वरित और दीर्घकालिक दोनों तरह की योजनाएं लागू की जाएं।

प्रशासन के अनुसार, पुराने कचरे के निपटान के लिए बायो-रीमेडिएशन तकनीक अपनाई जाएगी, ताकि कचरे के पहाड़ को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जा सके। साथ ही, नए कचरे के लिए सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता बढ़ाने और स्रोत पर ही कचरा पृथक्करण (गीला-सूखा) को सख्ती से लागू करने की योजना बनाई गई है। नगर निगम को डोर-टू-डोर कलेक्शन में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या भविष्य में और विकराल रूप ले सकती है। सरकार की मौजूदा सक्रियता को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन असली चुनौती योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की होगी। अब देखना यह है कि कचरे का यह पहाड़ वास्तव में हटेगा या फिर कुछ समय बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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