बस्तर के शिक्षक प्रधानमंत्री के विचारों से प्रेरित, बच्चों को पढ़ाई के साथ कला और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ा रहे, हुनर और सृजनात्मकता विकसित कर रहे।
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कुछ शिक्षक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रेरित होकर बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के तरीके भी सिखा रहे हैं। यहां के बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ कास्ट कला और पेंटिंग में भी निपुण हो रहे हैं।
स्थानीय शिक्षकों का मानना है कि सिर्फ़ अकादमिक शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों को कला, शिल्प और अन्य हुनर सिखाकर उन्हें स्वावलंबी और रचनात्मक बनाया जा सकता है। शिक्षक विभिन्न गतिविधियों और कार्यशालाओं के माध्यम से बच्चों में सृजनात्मकता और आत्मनिर्भरता विकसित कर रहे हैं।
बस्तर के बच्चों ने हाल ही में कास्ट कला और पेंटिंग में कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया। शिक्षक बताते हैं कि इन गतिविधियों से बच्चों का मनोबल बढ़ता है और सामाजिक कौशल भी विकसित होते हैं।
प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से प्रभावित शिक्षक बच्चों को स्थानीय संसाधनों का उपयोग करना और छोटे पैमाने पर व्यापारिक या शिल्प गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस पहल से न केवल बच्चों का सृजनात्मक विकास हो रहा है, बल्कि उनका आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण भी मजबूत हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि बस्तर जिले में यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक उदाहरण बन गई है। उन्होंने शिक्षकों की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास न केवल बच्चों के जीवन में बदलाव लाते हैं, बल्कि समाज और संस्कृति को भी सुदृढ़ करते हैं।
माता-पिता भी इस पहल से संतुष्ट हैं और कहते हैं कि बच्चों के हुनर को निखारने से उन्हें भविष्य में रोजगार और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में मदद मिलेगी। कई बच्चों ने स्कूल में बने कार्यशालाओं में अपने हस्तशिल्प और चित्रकारी उत्पाद भी बेचकर आर्थिक अनुभव प्राप्त किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सृजनात्मक गतिविधियों और हुनर विकास से बच्चों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित होती है। बस्तर का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।
