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सूर्यकांत तिवारी को तीन साल बाद मिली जमानत

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 8 August 2025

DMF घोटाले में तीन साल से जेल में बंद सूर्यकांत को मिली जमानत, जेल गेट छूकर किया नमन, जांच एजेंसियां अब भी कर रहीं जांच।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ (जिला खनिज प्रतिष्ठान) घोटाले में तीन वर्षों से जेल में बंद रहे अभियुक्त सूर्यकांत तिवारी को अंततः न्यायालय से जमानत मिल गई है। शनिवार को जैसे ही वह जेल से बाहर निकले, सबसे पहले उन्होंने जेल के मुख्य गेट को झुककर छुआ और सिर नवाया। यह दृश्य भावुक कर देने वाला था, जहां कानून के लंबे इंतजार के बाद उन्हें एक नई सांस मिली है। अब वह न्यायालय द्वारा निर्धारित जमानत की शर्तों का पूरी तरह पालन करेंगे।

सूर्याकांत की गिरफ्तारी और घोटाले का मामला

सूर्याकांत तिवारी को 2022 में डीएमएफ फंड के कथित दुरुपयोग के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने ठेके, आवंटन और मंजूरी प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं कीं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। यह घोटाला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक चर्चा का विषय रहा।

जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि सूर्यकांत ने प्रभावशाली लोगों के साथ सांठगांठ कर फर्जीवाड़ा किया और डीएमएफ फंड का दुरुपयोग निजी हितों के लिए किया। उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही लगातार जमानत की कोशिशें की जा रही थीं, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें लंबे समय तक राहत नहीं मिल सकी थी।

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कोर्ट से मिली जमानत, किन शर्तों के साथ हुई रिहाई?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें कड़ी शर्तों के साथ जमानत प्रदान की। अदालत ने कहा कि आरोपी को देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और हर सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जांच में सहयोग देने और साक्ष्यों को प्रभावित न करने की शर्तें भी तय की गई हैं। कोर्ट के अनुसार, यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जमानत रद्द की जा सकती है।

जेल से निकलते समय का दृश्य

जेल से बाहर आते ही सूर्यकांत तिवारी भावुक हो उठे। उन्होंने जेल के मुख्य गेट को छूकर सिर नवाया और हाथ जोड़कर धन्यवाद अर्पित किया। इस दौरान उनके परिजन और समर्थक भी बाहर मौजूद थे। कुछ समर्थकों ने उनका फूलों से स्वागत किया, जबकि अन्य ने “सत्यमेव जयते” के नारे लगाए।

आगे की रणनीति और राजनीतिक अटकलें

सूर्यकांत की रिहाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मामला एक बार फिर चुनावी मुद्दा बन सकता है। वहीं, विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेरता आया है और रिहाई के बाद इस प्रकरण को लेकर कई सवाल भी उठा सकता है।

वहीं सूर्यकांत तिवारी के वकील ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया था। अब वह न्याय की लड़ाई को और मजबूती से लड़ेंगे।

DMF फंड क्या है?

DMF यानी जिला खनिज प्रतिष्ठान, एक विशेष फंड होता है जो खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए बनाया गया है। इस फंड का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, पेयजल, आदि बुनियादी सुविधाओं के लिए किया जाता है। परंतु इस फंड का दुरुपयोग करना न केवल जनता के हितों के साथ अन्याय है, बल्कि एक बड़ा आर्थिक अपराध भी है।

जांच अभी जारी

हालांकि सूर्यकांत को जमानत मिल गई है, लेकिन यह मामला अब भी जांच के अधीन है। ईडी और एंटी करप्शन ब्यूरो जैसी एजेंसियां लगातार सबूत जुटाने में लगी हुई हैं। सूर्यकांत की जमानत का यह अर्थ नहीं है कि केस समाप्त हो गया है। जांच पूरी होने तक उन्हें सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

निष्कर्ष रूप में

सूर्यकांत तिवारी की जमानत ने जहां एक ओर उनके समर्थकों को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अब देखना होगा कि आगे जांच में क्या नए खुलासे होते हैं और अदालत इस मामले में क्या अंतिम निर्णय देती है।

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