रायपुर में सुधा सोसाइटी फाउंडेशन ने विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया, समानता, अधिकार, महिला सशक्तिकरण और वंचित वर्गों के हितों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सामाजिक सरोकारों के लिए कार्यरत संस्था सुधा सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’ के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के कमजोर, वंचित और हाशिए पर खड़े वर्गों के अधिकारों, समान अवसर और न्याय की अवधारणा को लेकर जागरूकता फैलाना रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा, विद्यार्थी एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं, बल्कि ऐसा सतत प्रयास है, जिससे हर व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिल सकें।
समानता और गरिमा का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत सामाजिक न्याय की शपथ के साथ हुई। वक्ताओं ने कहा कि समाज में आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में असमानता स्पष्ट दिखाई देती है। ऐसे में सामाजिक संगठनों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
सुधा सोसाइटी फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि संस्था लंबे समय से महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य परामर्श, कौशल विकास और सामाजिक सहायता जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’ के माध्यम से समाज को यह संदेश देना जरूरी है कि किसी भी तरह का भेदभाव—चाहे वह जाति, लिंग, वर्ग या आर्थिक स्थिति के आधार पर हो—सामाजिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है।
युवाओं और महिलाओं की भागीदारी
कार्यक्रम में युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। वक्ताओं ने कहा कि यदि युवा पीढ़ी सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को समझेगी, तभी भविष्य में एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की नींव मजबूत होगी।
महिला प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज भी कई क्षेत्रों में महिलाओं को समान अवसर नहीं मिल पाते। शिक्षा, रोजगार और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान सुधा सोसाइटी फाउंडेशन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर न रहें, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए स्वयं भी सहयोग और संवेदनशीलता दिखाएं। वक्ताओं ने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर एक जरूरतमंद की मदद करे, तो सामाजिक असमानता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
संस्था की ओर से यह भी कहा गया कि आने वाले समय में शिक्षा जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर, महिला सशक्तिकरण कार्यशालाएं और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।
सामाजिक न्याय से ही होगा समावेशी विकास
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राज्य या देश का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब समाज के सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। सामाजिक न्याय का अर्थ केवल अधिकार देना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर प्रदान करना भी है।
सुधा सोसाइटी फाउंडेशन ने इस अवसर पर समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी से सामाजिक एकता, भाईचारे और समानता के मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया।


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