कोरबा में उड़ती राख और कोयले के डस्ट से जनता परेशान। हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण और यातायात सुरक्षा पर कड़े कदम उठाने का आदेश दिया।
कोरबा। जिले में बढ़ते प्रदूषण और लगातार होने वाले सड़क हादसों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने उड़ती राख और कोयले के डस्ट से स्थानीय जनता को हो रही परेशानियों पर चिंता जताई और प्रशासन से ट्रैफिक एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने को कहा।
कोरबा में बिजली संयंत्रों और कोयला खानों के कारण हवा में धूल और राख का स्तर बहुत अधिक है। स्थानीय लोगों ने अदालत में दायर याचिकाओं में बताया कि उड़ती राख और डस्ट के कारण विजिबिलिटी घट गई है, सड़कों पर वाहन चलाना खतरनाक हो गया है, और बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अदालत ने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का मामला नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा और जीवन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि जब विजिबिलिटी घटती है तो सड़क हादसों का जोखिम बढ़ जाता है। अदालत ने प्रशासन से सख्ती से निर्देश दिए कि कोयले और राख से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए त्वरित उपाय किए जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो सरकार और संबंधित उद्योगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुबह और शाम के समय हवा में धूल का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों पर पड़ता है जिन्हें सांस की बीमारी या एलर्जी है। इसके अलावा, वाहन चालकों ने भी कहा कि धूल और राख के कारण सड़क पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है, और अक्सर हादसे होने की स्थिति बन जाती है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सड़क मार्गों की साफ-सफाई नियमित रूप से की जाए, धूल नियंत्रक उपाय जैसे पानी छिड़काव और रोड क्लीनिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही, कोयला खानों और बिजली संयंत्रों को भी पर्यावरण संरक्षण के मानकों के अनुसार चलाने को कहा गया है। अदालत ने कहा कि यह जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं है, बल्कि संबंधित उद्योगों की भी है कि वे प्रदूषण फैलाने वाले कार्यों में कटौती करें।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोरबा में हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। उड़ती राख और डस्ट से न केवल सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा है, बल्कि सड़क पर दुर्घटनाओं की संख्या भी बढ़ी है। उच्च न्यायालय ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो यह स्थिति और गंभीर रूप ले सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक की बेहतर व्यवस्था के लिए विशेष यातायात पुलिस तैनात की जाएगी, और सड़क किनारे धूल नियंत्रण के उपाय लागू किए जाएंगे। इसके साथ ही, उद्योगों को पर्यावरण नियमों के अनुसार काम करने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक उद्योगों को बिना उचित उपायों के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, अदालत ने प्रशासन से नियमित रिपोर्ट दाखिल करने को कहा, ताकि सुधार की निगरानी हो सके।
कोरबा में हवा की गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा दोनों ही मामले अत्यंत गंभीर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य और सड़क हादसों दोनों के मामले बढ़ सकते हैं। अदालत के निर्देशों को लागू करना स्थानीय प्रशासन और उद्योगों की जिम्मेदारी है।
इस फैसले के बाद जनता में उम्मीद जगी है कि जल्द ही कोरबा में हवा और सड़क सुरक्षा दोनों में सुधार होगा। लोगों ने कहा कि अदालत की सख्ती प्रशासन और उद्योगों के लिए चेतावनी की तरह है और यह जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम है।
