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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती उत्सव घोषित

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 26 July 2025


छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती पर 25 सप्ताह तक विभिन्न कार्यक्रम होंगे आयोजित, सरकार ने उत्सव आयोजन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।

रायपुर। छत्तीसगढ़ इस वर्ष राज्य गठन के 25 साल पूरे होने का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर को विशेष रूप से मनाने के लिए राज्य सरकार ने लगातार 25 सप्ताह तक आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला की घोषणा की है।

सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और विकासपरक कार्यक्रमों से भरपूर यह आयोजन न केवल राज्य की उपलब्धियों का उत्सव होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य गौरव और जिम्मेदारी का संदेश भी देगा। सरकार की ओर से इस आयोजन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

राज्य स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था, जब यह मध्यप्रदेश से अलग होकर भारत का 26वां राज्य बना। पिछले दो दशकों में राज्य ने विकास, संस्कृति, शिक्षा, खेल और औद्योगिकीकरण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

अब जब राज्य अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है, तो इसे रजत जयंती वर्ष के रूप में भव्य स्तर पर मनाने की योजना बनाई गई है।

क्या है योजना?

राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1 नवंबर 2025 से रजत जयंती वर्ष की शुरुआत होगी, जो 25 सप्ताह तक लगातार चलेगी। इन आयोजनों में शामिल होंगे:

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम – लोकनृत्य, लोकसंगीत, नाट्य मंचन, छत्तीसगढ़ी विरासत का प्रदर्शन
  • शैक्षणिक आयोजन – निबंध, वाद-विवाद, क्विज़, कला प्रतियोगिता
  • विकास यात्राएं – राज्य में अब तक हुए विकास कार्यों को दर्शाने वाले प्रदर्शन
  • जनसंवाद कार्यक्रम – आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने वाले मंच
  • सम्मान समारोह – राज्य के उन व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया

सभी जिलों में होंगे आयोजन

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी 33 जिलों में आयोजन सुनिश्चित किए जाएं। प्रत्येक सप्ताह किसी एक विषय पर आधारित कार्यक्रम आयोजित होगा। सभी विभागों, शैक्षणिक संस्थाओं, पंचायतों, नगर निकायों, सामाजिक संगठनों और युवाओं को इस महाउत्सव में भागीदार बनाया जाएगा।

राज्य स्तरीय आयोजनों के साथ-साथ ब्लॉक और ग्राम स्तर तक उत्सव की पहुँच सुनिश्चित करने की बात कही गई है, जिससे आम जनता की सीधी भागीदारी हो।

विशेष थीम आधारित सप्ताह

रजत जयंती वर्ष के दौरान हर सप्ताह एक थीम आधारित आयोजन किया जाएगा, जैसे:

  • छत्तीसगढ़ का इतिहास और संस्कृति
  • महिलाओं की भूमिका और सशक्तिकरण
  • युवा शक्ति और शिक्षा
  • पर्यावरण और जैव विविधता
  • जनजातीय विरासत
  • स्वास्थ्य और जनकल्याण
  • कला और खेल उपलब्धियां

इससे लोगों में राज्य की पहचान और उपलब्धियों के प्रति गर्व की भावना और जागरूकता दोनों बढ़ेगी।

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि रजत जयंती वर्ष से संबंधित हर आयोजन को सोशल मीडिया, वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रचारित किया जाए। इसके लिए एक विशेष लोगो और थीम सॉन्ग तैयार करने की भी योजना है, जो पूरे वर्ष के दौरान सभी आयोजनों में अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाएगा।

विभागों को मिली जिम्मेदार

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार आयोजनों की रूपरेखा तैयार करें। आयोजन की प्रगति की निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन भी किया गया है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि आयोजन समयबद्ध और प्रभावशाली हों।

स्कूल-कॉलेज होंगे केंद्र बिंदु

राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इस आयोजन में मुख्य भूमिका दी जा रही है। विद्यार्थियों के बीच रचनात्मकता, सहभागिता और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

विशेष रूप से युवाओं को छत्तीसगढ़ के इतिहास, भाषा, परंपरा और योगदान से जोड़ने के लिए संवाद सत्र और प्रेरणादायक व्याख्यान भी रखे जाएंगे।

जनभागीदारी होगी प्रमुख आधार

रजत जयंती समारोह को एक “जन-उत्सव” के रूप में मनाने पर जोर दिया गया है। इसलिए सरकार चाहती है कि आम नागरिक भी इसमें प्रत्यक्ष रूप से शामिल हों, चाहे वह ग्रामीण हों या शहरी, युवा हों या वरिष्ठ नागरिक।

लोक कलाकारों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला समूहों और किसान संगठनों को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों की यात्रा को रजत जयंती के रूप में मनाना सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि राज्य के आत्मसम्मान, उपलब्धियों और सामूहिक चेतना का उत्सव है।

सरकार की यह योजना न केवल गौरव का प्रतीक बनेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राज्य के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य से जोड़ने का अवसर भी देगी।

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